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माफिया से लड़ने पर पंकज को मिली निलंबन की सजा

Fri, 05 Oct 2018 01:38 AM IST
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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पिता अशोक लवानिया के साथ पंकज लवानिया। - फोटो : Rupesh
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रोडवेज के टिकट माफिया के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले कोई और नहीं खुद रोडवेज के मुलाजिम हैं। मुख्य शिकायतकर्ता हाथरस निवासी पंकज लवानिया वर्ष 2004 में संविदा पर बुद्धविहार डिपो अलीगढ़ में कंडक्टर बनेे थे। वह उत्तर प्रदेश रोडवेज कर्मचारी संघ हाथरस के शाखा मंत्री भी रहे हैं। पंकज के पिता अशोक भी रोडवेज में ड्राइवर पद से रिटायर हैं। बाप बेटे पूरी हिम्मत से भिड़े और आठ साल लंबे संघर्ष के बाद माफियाराज का अंत कराया। अपने इस संघर्ष में हर कदम पर साथ रहे अमर उजाला को भी उन्होंने सहयोग के लिए धन्यवाद दिया है।
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पंकज बताते हैं कि वर्ष 2007 में वह बुद्धविहार डिपो में कार्यरत थे, जब उन्होंने माफिया राज को करीब से देखा था। कुछ दिन बाद ही वह अतरौली डिपो भेजे गए। चार महीने बाद 2007 के आखिर में हाथरस डिपो में स्थानांतरित कर दिया गया। यहां आने के बाद ही उनका माफिया से पाला पड़ा। इस दौरान उनके पिता अशोक लवानिया भी हाथरस डिपो में रोडवेज ड्राइवर थे और वर्ष 2008 में रिटायर हुए।

बाप बेटे अक्सर इस माफिया के सामने पड़ जाते। दोनों शिकायत करते तो अधिकारी कुछ नहीं सुनते। हर शिकायत को अनसुना कर दिया जाता। पंकज ने भ्रष्टाचार की पहली शिकायत नवंबर 2010 को हाथरस के तत्कालीन एआरएम के खिलाफ थी, जिसमें ड्यूटी देने के नाम पर रुपये मांगने का आरोप था। शिकायत से भड़के अधिकारियों ने पंकज पर हरिजन एक्ट का मुकदमा करा कर उसकी संविदा समाप्त करा दी।
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वर्ष 2015 में वह इस मामले में कोर्ट से बाइज्जत बरी हुए तो एक साल लंबे संघर्ष के बाद कोर्ट के आदेश पर वर्ष 2016 में दोबारा से हाथरस डिपो में तैनाती दी गई। कुछ ही दिनों बाद माफिया ने पंकज को जान से मारने के लिए हमला किया, लेकिन हिम्मती पंकज ने बस मुसाफिरों की मदद से तीन हमलावरों को पकड़ा और सादाबाद थाने में बंद कराया। 19 जनवरी 2017 को पंकज ने पूरे माफिया गिरोह की शिकायत रोडवेज के तत्कालीन प्रबंध निदेशक के रविंद्र नायक से की थी। के रविंद्र नायक पूर्व में अलीगढ़ के जिलाधिकारी भी रह चुके थे।

एक शिकायत आईजी पुलिस आगरा से भी हुई, लेकिन पुलिस ने रोडवेज का मामला बता कर पल्ला झाड़ लिया। 22 जून 2017 को पंकज की एक झूठी शिकायत को आधार बना कर उसकी संविदा फिर से समाप्त कर दी गई। तब से वह निलंबित ही चल रहे हैं।

हार नहीं मानने वाले पंकज ने 22 जनवरी 2017 को पूरे प्रकरण की 100 पेज की विस्तृत रिपोर्ट, स्टिंग ऑपरेशन की डीवीडी, चार ऑडियो डीवीडी बना कर रोडवेज के वर्तमान प्रबंध निदेशक पी गुरु प्रसाद को सौंपी। यही शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह से की गई। जिसके बाद एसटीएफ की जांच हुई और ये कार्रवाई सामने आई है।

पंकज कहते हैं कि वर्ष 2017 में जब प्रदेश में योगी सरकार की ताजपोशी हुई तो उनको लगा था अब सिस्टम बदलेगा और उन्हें इंसाफ मिलेगा, लेकिन भ्रष्टाचार से लड़ते हुए वो खुद निलंबन का शिकार हो गए और आर्थिक तंगी भी झेली। कहते हैं कि अगर घर वालों का सपोर्ट नहीं होता तो इतना लंबा संघर्ष नहीं कर पाते।

तीन अक्तूबर बुधवार को जब अधिकारियों के निलंबन की कार्रवाई हुई तो पूरे परिवार ने राहत की सांस ली कि उनका संघर्ष कुछ तो काम आया। बुधवार को ही पंकज ने अपनी ज्वाइनिंग के लिए हाथरस के एआरएम को पत्र दिया है जो प्रबंध निदेशक को संबोधित है। शुक्रवार को वह एमडी पी गुरुप्रसाद से मिल कर उनसे भी यही अपील करेंगे।
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