बेशक अभी सरकारी घोषणा बाकी है। मगर पंचायत चुनाव का बिगुल गांव-गांव बज चुका है। सियासी खेमे बनकर तैयार हैं। उसी खेमेबंदी की रणनीति के अनुसार मुद्दे उपजाए जा रहे हैं। शतरंज की बिसात बिछाई जा रही हैं। इसी बिसात का हिस्सा इन दिनों जिले में जातीय समीकरण बने हुए हैं। कहीं भी मुद्दा गरमाने या जातीय सियासत को रंग देने के मकसद से विवाद खड़े किए जा रहे हैं। जिनमें कहीं महापुरुषों की प्रतिमाओं का सहारा लिया जा रहा तो कहीं मामूली आपराधिक विवादों को तूल दिया जा रहा है।
अपने अलीगढ़ जिले में अगर ध्यान दें तो जनवरी की शुरुआत में सबसे पहले प्रतिमा विवाद रोरावर क्षेत्र में सामने आया। उसे किसी तरह शांत किया गया। फिर दादों में ठीक उसी तरह का विवाद सामने आया। इसके अलावा अतरौली व इगलास में विवाद उपजाने के प्रयास हुए। अब चंद रोज पहले चंडौस क्षेत्र में महापुरुषों की प्रतिमा के विवाद ने तूल पकड़ा। ताजा दो गांव विजयगढ़ व इगलास फिर से विवाद की जद में हैं। इन विषयों को लेकर खुफिया टीमें भी सक्रिय हैं। अब तक जिले में 40 ऐसे गांव चिह्नित कर लिए गए हैं, जहां कभी भी जातीय विवाद तूल पकड़ सकते हैं। कहीं प्रतिमा तो कहीं अन्य विवाद सामने लाए जा सकते हैं। वहां अब सिस्टम होमवर्क करने में जुटा हुआ है।
ये बिल्कुल सही है कि पंचायत चुनाव से पहले उन गांवों में यह विवाद उपजाए जा रहे, जहां जातीय सियासत का असर है। कहीं महापुरुषों की प्रतिमा के सहारे तो कहीं किसी आपराधिक घटना को रंग देकर विवाद आगे किए जा रहे हैं। हमने जिले में 40 ऐसे गांव चिह्नित किए हैं, जिनमें जातीय विवाद उपजाए जा सकते हैं। ऐसे गांवों में हमारी टीमें लगातार सक्रिय हैं। 125 से अधिक सियासी लोग चिह्नत किए हैं। उन्हें लगातार हिदायतें दी जा रही हैं। अगर कोई फसाद हुआ तो वे सबसे पहले कार्रवाई की जद में आएंगे।-संजीव सुमन, एसएसपी