त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के मद्देनजर जिला प्रशासन और पुलिस ने लाइसेंस धारकों को शस्त्र जमा कराने का आदेश दिया था। मगर, अभी तक जिले के 37587 शस्त्र धारकों में से सिर्फ 60 फीसदी यानी करीब 22 हजार ने ही शस्त्र जमा कराए हैं। आगामी दो सप्ताह बाद जिले में पंचायत चुनाव का प्रचार शुरू हो जाएगा।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव हमेशा से रंजिश और टकराव भरा रहा है। इसको लेकर जिला प्रशासन और पुलिस हर मोड़ पर सतर्कता बरत रही है। जिले में सुरक्षा को लेकर तमाम इंतजाम किए हैं। बावजूद इसके पुलिस स्तर से थानावार लाइसेंसियों के हथियार नहीं जमा कराए जा पा रहे हैं। शस्त्र धारकों को उनकी सहूलियत के हिसाब से अपने थाने में या फिर आर्म्स डीलर के यहां हथियार जमा कराने की छूट दी गई है। सिटी मजिस्ट्रेट ने इस संबंध में सभी थानों से रिपोर्ट भी तलब की है। जिन लाइसेंसियों ने अपने हथियार जमा नहीं कराए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी जारी की है।
एक साल में बिके कारतूसों की होगी समीक्षा
सिटी मजिस्ट्रेट विनीत कुमार सिंह ने बताया कि शस्त्र विक्रेताओं के साथ बैठक कर एक साल में बिके कारतूसों का विवरण भी तलब किया जा रहा है। उसकी समीक्षा की जाएगी। इससे लाइसेंसियों को बेचे गए कारतूसों का मिलान होगा। साथ ही जिलाधिकारी की ओर से शस्त्र जमा कराने के लिए कमेटी का गठन किया है। सभी एसडीएम को यह आदेश दिया है कि अगर, कोई व्यक्ति अपनी सुरक्षा के लिहाज से शस्त्र जमा कराने में असमर्थता जाहिर करता है तो उसका फैसला वह स्वयं से करें।