अलीगढ़। पाकिस्तान से लाखाें की दौलत छोड़कर दिल्ली में रह रहे शरणार्थियों की हालत दयनीय है। इसके बावजूद वे यहां सकून महसूस करते हैं। वे भारत छोड़कर पाकिस्तान जाने की कल्पना से भी गुरेज करते है। इनकी बस इतनी तमन्ना है कि भारतीय समाज और सरकार उन्हें स्वीकार लें, ताकि उनकी बाकी जिंदगी आराम से गुजर सके। ऐसी ही इच्छा दिल्ली के मजनूं का टीला के शरणर्थी कैंप में रहने वालेे ज्ञानचंद भी रखते हैं। वह इनदिनाें अपना और अपने परिवार का इलाज कराने अलीगढ़ आए हुए हैं।
उन्हाेंने अपने लोगों का दर्द बयां करते हुए कहा कि दिल्ली के मजनूं का टील के कैंप में शरण लेने वाले पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों को कई तरह की परेशानी हैं। वे गंदे पानी से नहाने को मजबूर हैं। बिजली जेनरेटर से मिलती है। वह भी मात्र चार घंटे। केवल लाइट जलाने की इजाजत है।
तीन साल पहले भारत आते समय ज्ञानचंद को पाकिस्तान के सिंध प्रांत के हैदराबाद में दरिया किनारे 2000 बीघा जमीन औने पौने दाम में बेचनी पड़ी थी। पहले पत्नी मीरा इलाज के लिए भारत आईं। उसके बाद परिवार यहां आया। अलीगढ़ में पत्नी मीरा के अलावा बेटा रामा का भी इलाज चल रहा है। ज्ञानचंद सामान्य रूप से चल नहीं सकते। इसके लिए विशेष जूते बनवाए गए हैं। इनका अलीगढ़ में इलाज कराने का जिम्मा धर्म जागरण समिति ने उठाया है।
समिति के सत्य प्रकाश नवमान बताते हैं कि यह दुर्भाग्य है कि भारत में भी इन्हें मदद नहीं मिल रही। अपने स्तर से मदद के लिए मुहिम चलाने पर अब कुछ लोग सामने आए हैं। ज्ञानचंद के बच्चे पढ़ रहे हैं।
दिन में अंतिम संस्कार नहीं ज्ञानचंद ने बताया कि पाक में हिंदू परिवार में मौत होने पर दिन में शव का अंतिम संस्कार करने की इजाजत नहीं। उन्हें इसके लिए रात का इंतजार करना पड़ता है। रात में भी धार्मिक क्रियाओं का उच्चारण नहीं कर सकते।
भारत जीतता है तो गुस्सा निकालते हैंभारत, पाकिस्तान से यदि क्रिकेट या हॉकी मैच में जीत दर्ज करता है तो कुछ कट्टरपंथी संगठनों के लोग वहां के अल्पसंख्यकों पर जुल्म ढहाते हैं। ऐसे संगठनों की दलील है कि तुम पाकिस्तान की हार पर जश्न मनाते हो। उस रात परिवार की महिलाओं को खेतों या अन्य सुरक्षित ठिकानों पर छिपाना पड़ता है।