अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति ले. जनरल (सेवानिवृत्त) जमीरउद्दीन शाह ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान के पास हिम्मत नहीं है कि काउंटर करे।
शनिवार को एक कार्यक्रम के सिलसिले में एएमयू के गेस्ट हाउस नंबर 1 में पहुंचे कुलपति ने पत्रकारों से समक्ष सर्जिकल स्ट्राइक के फैसले को उपयुक्त समय पर लिया गया सटीक फैसला करार देते हुए कहा कि इससे कुछ महीनों के लिए आतंकी घटनाएं कम हो जाएगी।
किसी भी विपरीत परिस्थिति से निपटने के लिए इंडियन आर्मी तैयार है। उन्होंने कहा कि आतंकी घटनाएं रोकने के लिए सरकार द्वारा सारे प्रयास किए गए। जब पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो सर्जिकल स्ट्राइक जरूरी थी। उन्होंने कहा कि जब वे सेना में अधिकारी थे तो ट्रांसबॉर्डर मूवमेंट के लिए कई बार परमिशन मांगी थी लेकिन नहीं मिली।
दरअसल, ट्रांसबार्डर मूवमेंट के लिए सरकार की परमिशन जरूरी होती है। उन्होंने सेना की जमकर तारीफ की और कहा कि फौज देश का सबसे अच्छा आर्गेनाइजेशन है। उन्होंने कहा कि फौज सरकार से नए इक्विपमेंट मांग रही है। आज की यह सबसे बड़ी जरूरत हैं।
अगर डीआरडीए नहीं बना सकता तो इक्विपमेंट आयात कर सेना को आपूर्ति देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेना से बुलावा आया तो वह तैयार बैठे हैं। उन्होंने सैनिकों के वेतन पर ध्यान देने की वकालत की।
प्रख्यात इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब द्वारा यह कहे जाने पर कि ‘सेना को एलओसी क्रास नहीं करना चाहिए’ के सवाल पर कुलपति ने कहा कि उनके एवं प्रो. इरफान हबीब के ख्यालात बिल्कुल अलग-अलग हैं। वह प्रोफेसर एमरेट्स हैं। उनके बारे में कुछ नहीं कहूंगा। कुछ कहा तो प्रो. इरफान हबीब नाराज हो जाएंगे।