दिल्ली में पोस्टमार्टम के बाद बुधवार की शाम करीब सवा पांच बजे तिरंगे में लिपटा पालेंद्र चौधरी उर्फ पाली का शव गांव पहुंचा तो बेटे का शव देखते ही बिलख रही मां अमरवती बेहोश होकर गिर पड़ीं। बेटे के आत्महत्या करने की खबर मिलने के बाद से लगातार रोने की वजह से वह पहले ही बेसुध थीं। उनके गिरते ही महिलाएं उन्हें संभालने लगीं तो परिवार की अन्य महिलाओं और पिता की सिसकियां भी छूट पड़ीं।
पालेंद्र चौधरी अपने माता-पिता की इकलौते संतान थे। कैमथल गांव निवासी पालेंद्र चौधरी (24) के पिता महेश सिंह किसान हैं। सुबह से ही पालेंद्र के घर पर रिश्तेदारों के साथ ही आसपास के क्षेत्र के लोगों की आवाजाही शुरू हो गई थी। दिल्ली से शव आने का सभी इंतजार कर रहे थे। लगातार रोने से मां की आंखें सूनी पड़ गई थीं, लेकिन जैसे ही बेटे का शव सामने देखा तो वह बेहोश हो गईं।
देर शाम गांव में ही पालेंद्र के शव का अंतिम संस्कार किया गया। ताऊ के बेटे राकेश ने बहते आंसुओं के बीच भाई की चिता को मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में गोंडा के ब्लाक प्रमुख प्रदीप सिंह और रालोद नेता डॉ. हरचरन सिंह समेत सैकड़ों की संख्या में लगसमा क्षेत्र के निवासी व दिल्ली में पालेंद्र के साथ प्रशिक्षण ले रहे खिलाड़ी भी शामिल हुए।