सांकरा में गंगा का जलस्तर अब लगातार घट रहा है। आबादी वाले क्षेत्रों में भरा पानी भी सूखने लगा है, लेकिन खेतों में गंगा का पानी भरने से किसानों की धान और बाजार की फसल नष्ट हो गई है। इसे लेकर किसान चिंतित हैं। उन्होंने मुआवजे की मांग की है।
पिछले दिनों सांकरा क्षेत्र में गंगा का जलस्तर बढ़ने से नदी के आसपास के गावों व खेतों में पानी भर गया था, जिससे इलाके में सैकड़ों बीघा धान और बाजरा की फसल नष्ट हो गई। कुछ ही किसानों की धान की फसल आंशिक रूप से बची है। किसानों का कहना है कि हर साल गंगा का जलस्तर बढ़ने से उनकी फसल नष्ट हो जाती है, लेकिन प्रशासन की ओर से मुआवजा नहीं मिलता है।
गंगा के पानी से गांव में करीब 17 बीघा धान और बाजरा की फसल नष्ट हो गई है।
- रामरतन, गांव हारनपुर कला
10 बीघा बाजरा और 10 बीघा गन्ना की फसल बर्बाद हो गई है। मुआवजे के लिए कोई नहीं सुनता।
पीतांबर, गांव बबरोतिया
मेरी सात बीघा धान की फसल जलमग्न होकर नष्ट हो गई। अभी भी खेतों में पानी भरा हुआ है।
- बिन्नामी सिंह, गांव गोपालपुर
10 बीघा धान और पांच बीघा बाजरा की फसल बाढ़ के पानी से खराब हो चुकी है। सरकार से सर्वे कराकर मुआवजा दे।
रामकृष्ण यादव, गांव टोडरपुर
सांकरा क्षेत्र में गांवों में खेतों में पानी भरने से फसल नष्ट होने का सर्वे कराया जाएगा: राजेश वर्मा, तहसीलदार अतरौली