अलीगढ़ के मुस्लिम इलाकों में साइकिल फर्राटे से दौड़ी है। सपा के प्रति मुस्लिम वोटरों ने एक बार फिर से निष्ठा दिखाई है। सपा ने मुस्लिम बहुल इलाकों में जितने भी उम्मीदवार उतारे थे, उनसे से अधिकतर विजयी हुए हैं। इसके उलट भाजपा ने जिन 18 उम्मीदवारों को मुस्लिम इलाकों से उतारा था सब के सब बुरी तरह परास्त हुए हैं।
शहर की सरकार के लिए हुए मतदान के बाद आए नतीजों ने एक बार फिर साबित किया कि समाजवादी पार्टी के प्रति मुस्लिमों का प्यार बरकरार है। भले ही पार्टी मेयर का चुनाव हारी हो लेकिन 33 वार्डों पर उसके उम्मीदवार जीते हैं। निगम में वह प्रमुख विपक्ष की भूमिका निभाएगी। रोचक बात यह है कि सपा ने नगर निगम के सभी 68 वार्डों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। सपा के विजयी उम्मीदवारों में 32 मुस्लिम हैं। 90 पार्षदों के निगम सदन में एक तिहाई से भी ज्यादा पार्षद 35 मुस्लिम होंगे।
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अलीगढ़ के मुस्लिम इलाकों में साइकिल फर्राटे से दौड़ी है। सपा के प्रति मुस्लिम वोटरों ने एक बार फिर से निष्ठा दिखाई है। सपा ने मुस्लिम बहुल इलाकों में जितने भी उम्मीदवार उतारे थे, उनसे से अधिकतर विजयी हुए हैं। इसके उलट भाजपा ने जिन 18 उम्मीदवारों को मुस्लिम इलाकों से उतारा था सब के सब बुरी तरह परास्त हुए हैं। पार्टी ने पहली बार इतनी बड़ी संख्या में मुस्लिमों पर दांव लगाया था। कामयाबी के लिहाज से बेशक उसे विफलता हाथ लगी मगर प्रयोग को पूरी तरह विफल नहीं कहा जाएगा।
भाजपा ने 88 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। जिन मुस्लिम इलाकों में उसका कोई नामलेवा नहीं होता था उनमें इस बार न सिर्फ भाजपा के बस्ते दिखे बल्कि मुस्लिम उम्मीदवार, उनके परिजन, यार-दोस्त भाजपा की पैरोकारी करते नजर आए। भाजपा को एक मनोवैज्ञानिक लाभ य़ह हुआ कि उम्मीदवारी तय करने के मामले में वह मुस्लिमों से कन्नी काटने की छवि से बच गई। मुस्लिम इलाकों में भी भाजपा का उतना प्रबल विरोध और उसके पक्ष में सघन ध्रुवीकरण नहीं हो पाया।