बेगमबाग में रहने वाले जिस मुंशी का अपहरण के बाद कत्ल हुआ है। उसके बच्चे पढ़ने लिखने की उम्र में ही अब अनाथ हो गए। सोमवार को फोटो के आधार पर पिता के शव की पहचान करते हुए भाई-बहन ने बिलखते हुए कहा कि यह हत्या उनकी बुआ ने कराई है। उन्होंने कहा कि जब कत्ल के आरोप में पिता जेल गए थे। उसमें छूटकर आने के बाद परिवार से अलग शहर में रहने लगे। उनके हिस्से की जमीन तक को बुआ ने हड़प लिया और उन्हीं ने उनका कत्ल कराया है। हालांकि, पुलिस इस पहलू पर बच्चों को जांच के आधार पर कार्रवाई का दिलासा दे रही है।
पुलिस के सामने कुनाल व कनिष्का ने बताया कि वर्ष 2012 में गांव में एक व्यक्ति की हत्या हुई थी, जिसे बुआ अपना भाई मानती थी, मगर परिवार के कुछ लोगों को रिश्ते पर शक था। इस हत्या में पिता व परिवार के एक अन्य को जेल भेजा गया था। जेल से छूटकर आने के बाद बच्चों को लेकर मुन्नालाल शहर आ गए। इस बीच मुन्नालाल की पत्नी भी उसे छोड़कर चली गई। बच्चों ने बताया कि पहले भी उनके पिता पर बन्नादेवी क्षेत्र में हमला हुआ था। गोली चली थी। सीओ तृतीय श्वेताभ पांडेय ने बताया कि वैसे तो सभी तकनीकी जांच में इन दोनों के द्वारा हत्या करने के साक्ष्य मिले हैं। हालांकि बच्चों द्वारा जो तथ्य बताए जा रहे हैं, उन्हें भी जांच का हिस्सा बनाया जाएगा। पहले भी बच्चों ने बुआ वाला पहलू बताया था। मगर उसमें कोई सुराग नहीं लगा।
पहले दिन से अकेले दौड़ रहे थे भाई बहन
इस घटना में पहले दिन से ही दोनों भाई बहन अकेले पुलिस के पास चक्कर लगा रहे थे। एसएसपी तक से मिले। सीओ की अगुवाई में टीम को लगाया गया। हालांकि पुलिस को शुरुआती जांच में तथ्य हत्या के मिल गए थे। पुलिस ने आरोपी अपहरण में जेल भेज दिए। उसके बाद सोमवार को शव की पहचान फोटो के आधार पर हुई। अकराबाद में मिली लाश के सीने पर शेर बना हुआ था। उसी शेर को देख बेटे ने देखते ही पहचान लिया। साथ में शव पर पहनी शर्ट व पेंट भी पहचान ली। चूंकि शव का अंतिम संस्कार हो चुका है। इसलिए बच्चों को अपने पिता का आखिरी बार चेहरा देखने को नहीं मिला।
भाई के डर से बहन ने घर में स्थापित कराई थी पुलिस चौकी
2012 में हुए बिट्टू हत्याकांड को याद करें तो मृत मुन्ना की बहन संतोष शर्मा के प्रयास पर डेढ़ माह बाद खुलासा हुआ, जिसमें मुन्ना व दूसरे को जेल भेजा गया। इसके बाद संतोष ने खुद की हत्या का अंदेशा जताया। तत्कालीन एसएसपी पीयूष मोर्डिया के निर्देश पर भैंमती में संतोष के प्रयास से पुलिस चौकी स्थापित हुई थी। यह प्रकरण उस समय काफी सुर्खियों में रहा था।