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Aligarh News: शेखाझील की दुर्दशा, पक्षी वैज्ञानिक ने जताई चिंता

Tue, 22 Oct 2024 06:06 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

डॉ. असद आर रहमानी ने चिंता जताई कि शेखाझील को पक्षी विहार बनाकर संसाधन तो बढ़ाए गए लेकिन पक्षियों के लिहाज से झील का प्राकृतिक स्वरूप बिगाड़ दिया गया। पानी की जगह झील में दूर-दूर तक जलकुंभी नजर आ रही है।
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शेखाझील में जल कुंभी की सफाई करती जेसीबी मशीन - फोटो : संवाद
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विस्तार
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पक्षी वैज्ञानिक डॉ. असद आर रहमानी 21 अक्तूबर की शाम चार बजे एएमयू वाइल्ड लाइफ साइंस विभाग के प्रोफेसर और छात्रों के साथ शेखाझील पहुंचे। उन्होंनेे शेखाझील में दूर-दूर तक जलकुंभी देखकर चिंता जताई। झील से जलकुंभी हटाने के लिए एएमयू छात्रों से श्रमदान की अपील की।

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डॉ. असद आर रहमानी वर्ष 1975 में एएमयू के वाइल्ड लाइफ साइंस विभाग में कार्यरत थे। इसके बाद वह मुंबई चले गए थे। उन्होंने कहा कि 1975 में सड़क पर परिंदों का शोर सुनाई देता था। झील में पानी की सतह परिंदों से ढक जाती थी। शेखाझील को पक्षी विहार बनाकर संसाधन तो बढ़ाए गए लेकिन पक्षियों के लिहाज से झील का प्राकृतिक स्वरूप बिगाड़ दिया गया। पानी की जगह झील में दूर-दूर तक जलकुंभी नजर आ रही है। इसके लिए वह डीएम से पत्राचार करेंगे।

उनके साथ पर्यावरण पर काम करने वाले सुबोधनंदन शर्मा, प्रो. सतीश शर्मा, एसोसिएट प्रो. शरद कुमार, नेचर गाइड इशाक मोहम्मद, अली अर्जान, आदित्य राणा, मोहसिन जावेद, कौशलेंद्र आदि मौजूद रहे। इससे पहले वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर इंडिया (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया) के पूर्व निदेशक डॉ. परीक्षित गौतम के असामयिक निधन पर शोक मनाते हुए उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई।

पिछले दिनों एएमयू छात्रों ने किया था श्रमदान

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एएमयू वाइल्ड लाइफ साइंस विभाग के छात्र अर्जान अली ने बताया कि सात अक्तूबर को श्रमदान करते हुए छात्र-छात्राओं ने झील के पानी से कुछ जलकुंभी निकाली थी। इसके बाद वन विभाग ने जेसीबी के जरिये झील से जलकुंभी निकलवाना शुरू किया है। हालांकि इसकी गति धीमी है।

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