आयोजकों का कहना था कि मेला पिछले वर्ष तक कटरा मोहल्ले में होकर निकलता था। मगर अब कटरा मोहल्ले में गलियां ज्यादा संकरी हो गई हैं। झांकियों व बैंड आदि की ऊंचाई बढ़ गई हैं। इसके चलते पिछले वर्ष चार युवक करंट से झुलस गए थे, जबकि खुद काली स्वरूप भी दो पोलों में फंसने से दुर्घटना होने से बची थी। अगर दुर्घटना बड़ी हो जाती तो आयोजक फंसते। इसलिए मार्ग बदलना तय किया गया।
विरोधियों के ये तर्क
विरोध करने वालों का कहना था कि काली स्वरूप प्रतिवर्ष उनके दरवाजे से निकलता था और आरती होती थी। इस परंपरा को न बदला जाए। इसी बात का वे विरोध कर रहे थे।
इस मेले के पुराने इतिहास पर ध्यान दें तो वर्ष 1977 तक मेला इसी मार्ग से निकलता था, जिस मार्ग से आज निकला है। मगर 1978 में भूरा पहलवान की हत्या के बाद हुए दंगे के चलते मार्ग बदला गया था। उसी वर्ष से मेला कटरा की ओर से निकाला जा रहा था। चूंकि उस समय दंगा चार वर्ष तक रुक रुककर चला था। इसलिए लगातार उसी मार्ग से निकाला जाता रहा। तब से अब तक कटरा मार्ग से ही निकल रहा था।
पुलिस प्रशासन ने मेला नए मार्ग से न निकले, इसके पूरे प्रयास किए। मगर हमने प्रशासन की चुनौती स्वीकारते हुए मेला नए मार्ग से निकालना तय किया और नए मार्ग से निकाला। मेला सकुशल निकला। हम समाज के लिए हर चुनौती स्वीकारने को राजी हैं।-शकुंतला भारती, पूर्व मेयर, अलीगढ़
मेले के रास्ते को लेकर दो पक्षों में आपस का विवाद था। उसी लिहाज से हमने सुरक्षा इंतजाम किए थे। दोनों अलग अलग रास्तों से मेला निकालना चाह रहे थे। हमने समझाने का प्रयास किया। मगर मेला नए मार्ग से निकाला गया। सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया।-मृगांक शेखर पाठक, एसपी सिटी, अलीगढ़