खैर रोड पर करंट की चपेट में आने से जान गंवाने वाले चाट विक्रेता ओमवीर सिंह के परिवार को इंसाफ मिल गया है। स्थायी लोक अदालत ने इस हादसे के लिए पूरी तरह से बिजली विभाग को जिम्मेदार ठहराया है। कोर्ट ने विभाग को आदेश दिया है कि वह पीड़ित परिवार को 29.95 लाख रुपये का मुआवजा दे।
अदालत की सुनवाई के दौरान दोनों ही सरकारी महकमे अपनी जिम्मेदारी से भागते नजर आए। बिजली विभाग ने दावा किया कि नगर निगम द्वारा स्ट्रीट लाइट लगाने के काम के दौरान तार टूटे थे, जिससे यह हादसा हुआ। नगर निगम ने बिजली विभाग के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने नगर निगम की दलीलों को माना और बिजली विभाग की घोर लापरवाही को हादसे की मुख्य वजह ठहराया।
जलालपुर की रहने वाली शकुंतला देवी ने अपने पति ओमवीर की मौत के बाद न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने 30 सितंबर 2025 को अपने बेटों ललित व कपिल और बेटी पिंकी के साथ मिलकर अधिशासी अभियंता विद्युत नगरीय खंड तृतीय सारसौल और नगरायुक्त के खिलाफ केस दर्ज कराया था।
स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष शंकर लाल, वरिष्ठ सदस्य सत्यदेव और सदस्य आरती की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने मृतक ओमवीर सिंह की मासिक आय 20 हजार रुपये मानते हुए मुआवजे की कुल राशि 29.95 लाख रुपये तय की। यह पूरी रकम अब अधिशासी अभियंता विद्युत नगरीय खंड तृतीय सारसौल को पीड़ित परिवार को सौंपनी होगी।