राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन की बैठक गुरुवार को लाल डिग्गी प्रांगण में इंजीनियर विनेश कुमार की अध्यक्षता में हुई। इसमें महापौर शकुंतला भारती द्वारा अवर अभियंता अंशुल कुमार पर लगाए आरोपों को निराधार और गलत बताया गया।
गौरतलब है कि 26 अप्रैल को महापौर शकुंतला भारती दो महिलाओं के साथ मुख्य अभियंता कार्यालय पर पहुंची थीं। यहां पर हेमवती और योगेंद्र के संयोजन के लिए अवर अभियंता पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था।
जबकि पत्रावलियों के साक्ष्यों से स्पष्ट है कि दोनों आवेदकों को कनेक्शन देने के लिए विभाग में क्रमश 19,166 और 24,707 रुपये जमा कराने थे, लेकिन यह पैसा जमा नहीं कराकर दोनों बिजली अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव बनाने में लगे रहे। बैठक में महापौर द्वारा दिए गए बयान क्या विभाग में सभी काम नियम से हो रहे हैं, के संबंध में भी आपत्ति दर्ज की गई ।
बैठक में कहा गया कि लगता है महापौर विभागीय नियमों के विरुद्ध कार्य कराने की पक्षधर हैं। 26 अप्रैल को मुख्य अभियंता पर दबाव बनाकर आदेश जारी करवाया गया, जिसमें जिन परिसरों की दूरी 40 मीटर से अधिक है, उनके बिजली कनेक्शन स्वीकृत हो चुके हैं।
इससे महापौर के कुछ खास व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने की मंशा से अन्य सभी व्यक्तियों पर आर्थिक अधिभार डाल दिया गया है।