इस जानकारी पर साइबर सेल प्रभारी राहुल चौधरी व उनकी टीम ने जब काम किया तो कुछ लोगों के नाम प्रकाश में आए। इन पांचों पर अलीगढ़ में भी पांच मुकदमे दर्ज हैं। साथ में अन्य जिलों में एक दर्जन मुकदमे हैं। जिन्हें महुआ खेड़ा थाना पुलिस के सहयोग से पकड़ा गया। पकड़े गए आरोपियों में हाथरस के तरफरा के दो सगे भाई इरफान व इमरान के अलावा महुआ खेड़ा के ईकरी का फईम व नोएडा के मेहंदीपुर जेवर का इंसाफ अली शामिल हैं।
इनके पास से 14 फर्जी आधार कार्ड, 3 फर्जी पेनकार्ड, 2 एटीएम कार्ड, 1 वोटर आईडी कार्ड, 4 मोबाइल फोन व 1 बाइक बरामद हुई। इन चारों ने स्वीकारा कि इरफान व इमरान अलीगढ़-हाथरस में मजदूर खोजते थे। उन्हें इनामी लालच देकर जनसेवा केंद्र तक लाते। वे जनसेवा केंद्र वाले को प्रति खाता अपनी मर्जी से खुलवाने के 700 रुपये देते। बाद में उस खाते को फईम को 1500 से 2000 रुपये तक में बेचते। फईम उस खाते को 3500 रुपये में इंसाफ को बेचता था।
मजदूरों तक पहुंची पुलिस, तब खुला भेद
मजदूर उस वक्त हैरान होते थे, जब किसी साइबर ठगी पर पुलिस बैंक खाते की मदद से उन तक पहुंचती। इस तरह की शिकायतें पुलिस तक पहुंची, तब यह भेद खुला।