ये प्रक्रिया अपनाती है जीआरपी
किसी भी शव के मिलने या ट्रेन दुर्घटना में मृत्यु होने पर जीआरपी शव को सुरक्षित करती है। इसके लिए जीआरपी को एक किट मिलती है। उस किट में शव रखकर किसी ऑटो-टिर्री या टेंपो के जरिये शव पोस्टमार्टम केंद्र भिजवाया जाता है। उस वाहन चालक को जीआरपी 400 से 500 रुपये तक किराया देती है। पहचान होने पर पोस्टमार्टम के बाद शव परिजन ले जाते हैं अन्यथा 72 घंटे के इंतजार के बाद पोस्टमार्टम कराकर शव मानव उपकार संस्था को सौंप दिया जाता है। साथ में संस्था को अंतिम संस्कार के लिए 400 रुपये दिए जाते हैं। उसी 400 रुपये में संस्था कफन-पॉलीथिन से लेकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करती है। अब बाकी रकम जीआरपी कहां खर्च करती है इसका किसी के पास कोई जवाब नहीं।
2004 से हम जीआरपी की ओर से भेजे जाने वाले अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार करा रहे हैं। तभी से तय किए गए 400 रुपये हमें जीआरपी प्रति शव दे रही है। कई बार महंगाई के अनुसार मौखिक बजट बढ़ाने के लिए कहा गया मगर ध्यान नहीं दिया गया। हालांकि जीआरपी को मिलने वाले बजट में बढ़ोतरी हो चुकी है।-विष्णु कुमार बंटी, अध्यक्ष मानव उपकार
ऐसा दिखाया जाता है रकम का खर्च
इस विषय में जीआरपी की ओर से कोई साक्ष्य तो नहीं दिखाए गए मगर सूत्रों के अनुसार जीआरपी इन्हीं रुपयों में से क्षतिग्रस्त शवों को उठाने के लिए मजदूर को रुपये देने, पोस्टमार्टम में शव की सिलाई कराने से लेकर उनकी पहचान के प्रयास के नाम पर पोस्टर छपवाने पर खर्च दिखाया जाता है। हालांकि यह नियम विपरीत है।
जीआरपी अफसरों को नहीं स्पष्ट जानकारी, डीजी बोले-कराएंगे जांच
इस विषय में जब प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र कुमार द्विवेदी से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले तक अंतिम संस्कार के पांच हजार रुपये मिलते थे। अब रुपये बढ़ गए हैं ये अभी संज्ञान में नहीं है। रहा सवाल यहां अंतिम संस्कार प्रक्रिया और उस पर होने वाले खर्च का तो इस विषय में पूरी तरह से सही जानकारी नहीं है। हाल में जिम्मेदारी संभाली है। इस व्यवस्था को दिखवाया जाएगा। कहां किस स्तर पर कमी है उसे सुधारा जाएगा।
इसी तरह सीओ जीआरपी इटावा उदय प्रताप का कहना है कि उन्हें इस विषय में सटीक जानकारी नहीं है जो भी गड़बड़ी है, उसकी सही जानकारी करने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। वहीं डीजी जीआरपी प्रकाश डी से जब इस विषय में बात हुई तो उन्होंने गंभीरता दिखाते हुए मामले में जांच कराकर नियमानुसार व्यवस्था लागू कराने की बात कही।
कुछ खास तथ्य जानिये
- पांच वर्ष में जीआरपी ने 67 अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार के लिए रुपये लिए
- पांच हजार रुपये मई माह तक मिलते थे, जून से बजट बढ़कर सात हजार रुपये हुआ
- पांच अज्ञात शवों के लिए मई से अब तक 7 हजार प्रति शव जीआरपी ने लिए हैं रुपये
- 400 रुपये शव पोस्टमार्टम में पहुंचाने और इतना ही अंतिम संस्कार का है खर्च
- बाकी रकम कहां जाती है इसका किसी के पास नहीं कोई जवाब, उठ रहे हैं सवाल