नई परियोजना 660 मेगावाट में बीते दिनों सीआइएसएफ ने कबाड़ से भरे तीन ट्रक पकड़े थे। जिसमें कार्यदायी कंपनी तौसीबा के एचआर प्रतिनिधि ओमप्रकाश नैनवाल एवं परियोजना जीएम मयंक मांगलिक के नाम प्रकाश में आए। परंतु विभागीय स्तर पर कुछ स्पष्ट नहीं हुआ। न ही किसी तरह की कार्रवाई हुई।
भ्रष्टाचार के चलते नहीं हो पा रहा नई यूनिट की स्थापना का फैसला
तापीय परियोजना में छह पुरानी इकाइयां हैं। जिनका कबाड़ बेचने की टेंडर प्रक्रिया भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते पूरी नहीं हो पा रही है। सिविल विभाग की तरफ से टेंडर प्रक्रिया की शुरूआत की गई थी, लेकिन इसमें सिविल अधिकारियों के द्वारा टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी करने के आरोप लगने लगे। इसकी शिकायत भी हुई। जिसके चलते प्रक्रिया आगे के लिए टाल दी गई। इसमें सिविल के अधीक्षण अभियंता से लेकर जेई तक का नाम सामने आया था। इसके बाद मामले में कुछ भी स्पष्ट नहीं हुआ है। संविदाकारों की तरफ से हो रही शिकायत पर लखनऊ मुख्यालय सक्रिय हुआ। बताया जा रहा है विभागों में उठे टेंडरों की जांच होना शुरू हो गया है। अभी अन्य विभागों के अधिकारी इसमें नप सकते हैं। परियोजना में कुल चार इकाइयां हैं, जिसमें से सात नंबर इकाई अभी तकनीकी कमी के चलते बंद पड़ी हुई है। बाकी तीन इकाइयों से बिजली का उत्पादन हो रहा है।
करोड़ों रुपये से बनी दीवार ढह गई
तापीय परियोजना प्रबंधन के द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गए एश डंप यार्ड की एक दीवार कुछ दिनों पहले ही गिरी है। खराब सामग्री के चलते दीवार ताश के पत्तों की तरह बिखर गई थी। इसमें कार्यदायी कंपनी इन विराल्ड के अधिकारी एवं सिविल अधिकारियों की मिली भगत पर सवाल उठा था। जहां पर सीमेंट की ईटों से काम होना था, वहां पर राख की ईटें लगा कर दीवार को खड़ा किया गया था। इस काम की लागत 80 करोड़ रुपये बताई गई थी, जिसकी दीवार चार माह में ही ढह गई। दीवार के गिरने से खेतों में खड़ी फसल में पानी भर गया। जिससे किसानों को काफी नुकसान हुआ। किसानों ने फसल मुआवजे की मांग परियोजना प्रबंधन से की थी, लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला।