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शेखाझील: हजारों किलोमीटर दूर से आते हैं परिंदे, देखने के लिए दूरदराज से आते हैं पक्षी प्रेमी

Mon, 27 Nov 2023 12:53 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

अलीगढ़ की शेखा झील में हिमालय की बर्फीली घाटियों से लेकर निकटवर्ती देश चीन, श्रीलंका, रूस, भूटान व पोलेंड से परिंदे आकर प्रवास और प्रजनन करते हैं। जिन्हें देखने के लिए दूरदराज के पक्षी प्रेमी आते हैं।
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अलीगढ़ की शेखा झील में पक्षी - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अलीगढ़ के एक मात्र पर्यावरणीय और प्राकृतिक पर्यटक स्थल के लिए मशहूर पक्षी विहार शेखा झील में अक्तूबर के अंत से सर्द मौसम की शुरुआत के साथ ही विदेशी परिंदों का आना शुरू हो जाता है।

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विभागीय अनदेखी के चलते बीते दिनों झील सूख गई, आनन फानन में दो दो सोलर पंप चलाकर झील भर कर परिंदों की प्यास बुझाने की कोशिश की गई ,लेकिन यह भी नाकाफी साबित हुआ। 24 नवंबर तक काफी हिस्सा सूखा हुआ था। दो दिन पहले पास से जा रही अपर गंग नहर में पानी आने के बाद कुलावे से झील में भी पानी आना शुरु हो गया है। इधर, दो तिहाई हिस्से में फैली जलकुंभी भी मेहमान परिंदों के पांव की बाधा बन रही है।

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यही कारण है कि इस बार नवंबर की विदाई होने तक प्रवासी परिंदों की संख्या अन्य वर्षों की तुलना में काफी कम है। वन विभाग का कहना है कि अभी मौसम में दोपहर के वक्त कुछ गर्माहट बनी हुई है, जिसके कारण प्रवासी परिंदों की संख्या कम है। वहीं पर्यटक और पक्षी प्रेमियों का मानना है कि झील में पानी की कमी और जलकुंभी के कारण परिंदों की कमी हो रही है।

परिंदों की संख्या शेखाझील पर ही नहीं वरन अन्य झीलों पर भी कम है, जो मौसम में गर्माहट के कारण है। झील की सफाई के लिए दो साल से बजट नहीं मिला है। अन्य मदों से सफाई करा रहे हैं। जल्द ही सोलर बैटरियों की व्यवस्था कर पेयजल को सुचारू किया जायेगा। -दिवाकर वशिष्ठ, प्रभागीय वन अधिकारी।
नवंबर में परिंदों की संख्या ठीकठाक रहती थी, लेकिन इस बार काफी कम संख्या में प्रवासी परिंदे दिखाई पड़ रहे हैं। झील की साफ सफाई और पानी की उचित व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है।-शालिनी सिंह, पूर्व छात्रा वाइल्ड लाइफ एएमयू।

झील का इतिहास

पर्यावरणविद सुबोध नंदन शर्मा बताते हैं कि झील का पता मुगलकाल में हुआ था। अंग्रेजों द्वारा सन 1852 में अपर गंग नहर के निकालने के बाद तीन भागों में बंट गई, जिससे इसका क्षेत्रफल कम हो गया। 40 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैली झील को 8 फरवरी 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वर्ड सेंचुरी घोषित कर दिया था। जिसके बाद 3.04 करोड़ रुपये की धनराशि से चारदीवारी, मुख्य द्वार, कार्यालय, कैंटीन तथा पार्किंग का निर्माण हुआ है, लेकिन यहां पीने का स्वच्छ पानी तक नसीब नहीं है। ये हाल तब है जब पर्यटकों से प्रवेश शुल्क के रूप में 30 रुपये लिए जाते हैं।



इन देशों के परिंदे करते हैं प्रवास
यहां हिमालय की बर्फीली घाटियों से लेकर निकटवर्ती देश चीन, श्रीलंका, रूस, भूटान व पोलेंड से परिंदे आकर प्रवास और प्रजनन करते हैं। जिन्हें देखने के लिए दूरदराज के पक्षी प्रेमियों समेत एएमयू वाइल्ड लाइफ विभाग के छात्र-छात्राएं भी आते हैं।



ये आते हैं मेहमान परिंदे
यहां पर ग्रेलक ग्रूज (हंस), बार हेडेड गूज (राजहंस), ब्रह्मणी सैल डक (चकवा- चकवी), रेड क्रस्टेड पोचार्ड, टफ टफ पोचार्ड, मलार्ड, मलार्ड टील, कांमन टील, मार्बल्ड टील, पेन्टिल, सौबलर, रेड पोचार्ड, टफ टफ पोचार्ड, कांमन पोचार्ड, लाल सर, कांमन कूट, पेलीकन, कार्मोस्ट सैलडक, व्हाइट पेलीकन, पेंटेड स्टार्क, ब्लैक हेडेड गल, गैडबाल, स्पून बिल डक, गार्गिनी समेत डेढ सौ से अधिक प्रजातियों के पक्षी यहां आते हैं। फिलहाल लगभग पंद्रह से बीस प्रकार की प्रजातियों के परिंदे यहां मौजूद हैं।
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ये हैं स्थानीय परिंदे

सारस, पुल पुल मूरहेन, पनकौआ, जलकौआ, ब्लैक आइविश, व्हाइट आईविश, बड़ा बगुला, स्पॉट बिल, ओपन बिल, जल मुर्गा, डार्टर, ग्रे हीरोन, पेटेंड स्ट्रोक, ग्रेट कोरमोरेंट, पर्पल हीरोन, कॉम्ब डक, व्हाइट आईबिज, ब्लैक हैडेड आईबिज, ओपन बिल स्ट्रोक, स्पॉट बिल्ड डक, ब्लैक नेक्ड स्ट्रोक, व्हाइट ब्रेस्टेड वाटर हेन, कॉमन मूरहेन, लिटिल कोरमोरेंट, व्लाइट आईबिज।



हजारों किलोमीटर दूर से आते हैं परिंदे
पर्यावरणविद् सुबोध नंदन शर्मा का कहना है कि विदेशी परिंदे करीब 11000 किलोमीटर की दूरी तय कर शेखा झील पहुंचते हैं। यह एक बार उड़ान भरते हैं तो फिर सीधे अपने निर्धारित स्थान पर ही पहुंचते हैं। उड़ान भरते समय यह वातावरण से ही भोजन लेते हैं इसलिए यह रास्ते में कहीं रुकते नहीं हैं। विदेशी से लेकर स्थानीय प्रजातियों के कुल मिलाकर लगभग 180 प्रजाति के परिंदे प्रवास और प्रजनन करते हैं। नेचर गाइड इशाक मोहम्मद के अनुसार कई साल से सारस के कई कई जोड़े अंडे दे रहे हैं। नील गाय भी यहां बच्चों को जन्म देती है।

ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए वन डेस्टिनेशन’ ओडी कार्यक्रम के तहत शेखा झील चयनित है। इसके तहत झील को पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित करना था। परंतु अभी तक इस दिशा में धरातल पर कुछ होता दिखाई नहीं पड़ता। डीएफओ दिवाकर वशिष्ठ का कहना है योजना के तहत झील पर दो अलग अलग स्थानों पर फौव्वारे लगाकर सेल्फी पाइंट बनाना है। नहर किनारे की जगह में नौकायान और परिंदों के मॉडल बनाए जाएंगे।
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