आंकड़ों में महज 294 बच्चे हैं शिक्षा से वंचित
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बेसिक शिक्षा विभाग के आंकड़े के हिसाब से तो ऐसा लगता है कि जैसे हर बच्चा विद्यालय जाता है और शिक्षा ग्रहण कर रहा है। वह शिक्षा के साथ-साथ अन्य सरकारी योजनाओं का भी लाभ प्राप्त कर रहा है जबकि सच्चाई इसके विपरीत दिखाई देती है। सड़कों से लेकर दुकानों और फैक्ट्रियों में सैकड़ों की तादाद में बाल श्रमिक देखने को मिल सकते हैं। सरकारी आंकड़ोें के हिसाब से जिले में केवल 294 बच्चे ही शिक्षा से वंचित हैं यानी विद्यालय नहीं जाते। हाउस होल्ड सर्वे की यह रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। हालांकि खुद शिक्षा विभाग के अधिकारी यह मान रहे हैं कि हाउस होल्ड सर्वे ठीक तरह से नहीं हुआ है और आउट ऑफ स्कूल बच्चों की संख्या काफी ज्यादा होगी।
परिषदीय विद्यालयोें में सत्र शुरू होने के दौरान हाउस होल्ड सर्वे कराया गया। इसमें बीईओ, शिक्षक-शिक्षिकाएं, प्रेरक आदि गांव-गांव और गली, मोहल्लों में जाकर विद्यालय न जाने वाले बच्चों के बारे में जानकारी करते हैं और देखते हैं कि कितने बच्चे आउट ऑफ स्कूल हैं। कभी विद्यालय न जाने वाले बच्चों का विद्यालयों में नामांकन कराया जाता है।
इस बार जो रिपोर्ट भेजी गई है, उसके हिसाब से जिले में महज 294 बच्चे ही आउट ऑफ स्कूल हैं। वहीं जब दुकानों, बाजारों, फैक्ट्रियों पर नजर डालें तो काफी तादाद में बाल श्रमिक काम करते देखे जा सकते हैं। ऐसे में बेसिक शिक्षा महकमे का यह आंकड़ा हवा-हवाई नजर आता है। पिछली साल जिले में इस तरह से 306 बच्चे चिन्हित किए गए। इसके विपरीत खुद एडी बेसिक गिरिजेश चौधरी ने माना है कि यह आंकड़ा ठीक नहीं है। निश्चित रूप से आउट ऑफ स्कूल बच्चों की संख्या कहीं ज्यादा होगी। शासन का इस बात पर जोर है कि शिक्षा से वंचित बच्चों को विद्यालय भेजा जाएं। इसलिए जहां भी जो बच्चा विद्यालय नहीं जा रहा होगा, उसका विद्यालयों में दाखिला कराया जाएगा।