स्मार्ट सिटी योजना में बने इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) से सफाई, पेयजल आपूर्ति, स्ट्रीट लाइट, अतिक्रमण, खाली प्लॉट में भरे कूड़े और सुरक्षा व्यवस्था की सघन निगरानी की जाएगी। लगभग 20 करोड़ रुपये से बने आईसीसीसी के कैमरे शहर के हर कोने, चौराहे, गलियों और मोहल्लों की निगरानी करेंगे।
शनिवार को मंडलायुक्त संगीता सिंह, नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा और एमएलसी एवं एएमयू के पूर्व कुलपति डॉ. तारिक मंसूर ने इसका शुभारंभ किया। उन्होंने इस सिस्टम को आधुनिक युग की सबसे बड़ी जरूरत बताया।
कल्याण सिंह हैबिटेट सेंटर के छठवें फ्लोर पर बने कंट्रोल रूम में 17 बाई 6 मीटर की बड़ी स्क्रीन पर 1000 हाईटेक कैमरों का नेटवर्क जोड़ा गया है। इसकी स्टोरेज क्षमता 3.2 पीएम (पेटा बाइट) है। इसमें 10 से लेकर 30 दिन तक का डाटा सुरक्षित रखा जा सकता है। यातायात व्यवस्था के लिए यह सेंट्रल नर्वस सिस्टम के रूप में काम करेगा।
नगर आयुक्त ने बताया कि सेवा भवन में संचालित पुराना आईसीसीसी काफी छोटा था। स्क्रीन भी छोटी थी, जिससे केवल 300 कैमरे जुड़े थे। इसकी डाटा स्टोर क्षमता 2 पीबी थी। नए सेंटर में आधुनिक तकनीकी, स्मार्ट संचालन, स्मार्ट सर्विलांस होगा।
यहां पर मुख्य अभियंता वीके सिंह, लेखाधिकारी भरत कुमार दुबे, शिवकुमार सुमन, अहसान रब, पार्षद योगेश सिंघल, सद्दाम अशरवी, बॉबी कुमार मौजूद रहे।
कमिश्नर ने ऑनलाइन चालान देखा :
कमिश्नर ने मौके पर ही यातायात नियमों को तोड़ने वालों के चालान करने की ऑनलाइन प्रक्रिया को देखा। हेलमेट नहीं लगाने पर एक, ट्रिपिल राइडिंग पर एक व रेड लाइट जंप करने पर एक कार का ऑनलाइन चालान किया गया। सारसौल चौराहे पर जाम लगने पर वाहनों को हटाने की चेतावनी दी गई।
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प्रमुख चौराहों पर 571 सीसीटीवी : प्रमुख चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर कुल 572 सीसीटीवी हैं। इनमें 64 पीटीजेड कैमरे और 227 फिक्स्ड कैमरे शामिल हैं। यातायात नियमों के प्रभावी अनुपालन के लिए 108 एएनपीआर (ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन), 74 रेड लाइट वायलेशन डिटेक्शन, 74 वीडियो डिटेक्शन कैमरे तथा 16 स्पीड वायलेशन डिटेक्शन सिस्टम लगाए गए हैं। सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आठ रडार सिस्टम, 10 फेस रिकग्निशन सिस्टम तथा ड्रोन से निगरानी की जा रही है।
20 चौराहों पर एटीसी सिस्टम लगा : 20 प्रमुख चौराहों पर एडैप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम (एटीसीएस) लगा है, जिससे यातायात प्रवाह को वास्तविक समय के अनुसार नियंत्रित किया जा रहा है। 40 पब्लिक एड्रेस सिस्टम, 40 इमरजेंसी कॉल बॉक्स, 25 वैरिएबल मैसेज डिस्प्ले, 30 आउटडोर एलईडी स्क्रीन और पर्यावरण निगरानी के लिए 10 सेंसर स्थापित किए गए हैं।
एआई आधारित स्मार्ट एनालिटिक्स : इससे बिना हेलमेट, ट्रिपिल राइडिंग, गति सीमा उल्लंघन तथा अन्य यातायात अपराधों की स्वतः पहचान की जा रही है। इसके लिए 100 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क बिछाया गया है। स्मार्ट ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म से संपत्ति कर प्रबंधन, जल कर बिलिंग, जन्म-मृत्यु पंजीकरण आदि की सुविधा सिंगल विंडो से दी जा रही है।
यह होगा लाभ
एलईडी स्ट्रीट लाइट 12 घंटे में ठीक करनी होगी।।
कूड़ा उठाने वाले वाहनों पर नजर रखी जा सकेगी।
अतिक्रमण करने वालों को चिह्नित किया जा रहा है।
नोटिस के बाद दोबारा अतिक्रमण करने पर कार्रवाई।
नलकूपों के खराब होने, चलने और बंद होने पर रखेंगे नजर।
जन शिकायतों का निस्तारण ग्रीवांस रिड्रेसल सिस्टम से 24 घंटे में।