कुरान और एएमयू को लेकर जो स्वामी नरसिंहानंद सरस्वती ने बयान दिया है, उसको लेकर एएमयू के छात्र नेताओं और मुस्लिम विद्वान ने कड़ी आपत्ति जताई है। बोले, ऐसी मानसिकता रखने वाले स्वामी सरस्वती को जेल भेज देना चाहिए। इनकी जगह समाज में नहीं है, क्योंकि वह वैमनस्यता की बीज रोप रहे हैं।
कुरान इंसानियत को फायदा पहुंचाती है। कुरान जैसी दूसरी किताब नहीं है, जिसको पढ़ने वाले दुनिया में सबसे ज्यादा है। स्वामी नरसिंहानंद सरस्वती को जेल में डाल दिया जाना चाहिए। देश की तरक्की में एएमयू की बहुत भूमिका है। स्वामी जैसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
-चौधरी इफराहीम हुसैन, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय समाज सेवक संगठन
स्वामी नरसिंहानंद सरस्वती जैसे लोग अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को हिंदू-मुस्लिम के चश्मे से देखते हैं। एएमयू एक धर्मनिरपेक्ष शैक्षिक संस्था है। अगर उन्हें एएमयू के बारे में जानना है, तो वह प्रवेश लेकर देख लें। स्वामी ने जो कुरान को लेकर बातें कही हैं, वह आपत्तिजनक है। कुरान पर गलत बोलने वालों का हश्र दुनिया देख चुकी है।
-मोहम्मद नदीम अंसारी, पूर्व उपाध्यक्ष, छात्रसंघ एएमयू
मुल्क का एक प्रतिष्ठित संस्था एएमयू है। इसके जिक्र के बिना हिंदुस्तान की आजादी की दास्तान मुकम्मल ही नहीं हो सकती। आजादी की वह तहरीक जिसमें असहयोग आंदोलन की बुनियाद एएमयू के 350 छात्रों की गिरफ्तारी पर रखी हुई हो, ऐसे संस्थान से अंग्रेजों के मुखबिर और उनकी औलादें क्यों न करें।
-आमिर मिंटो, पूर्व छात्र नेता, एएमयू, सामाजिक कार्यकर्ता
जिस यूनिवर्सिटी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी अपने भाषण में मिनी इंडिया कहा था, उस मिनी इंडिया के बारे में स्वामी नरसिंहानंद के बिगड़े बोल हैं। सरकार से मांग करते हैं कि ऐसे देश विरोधी मानसिकता रखने वाले व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और जेल भेजे।
-फरहान जुबैरी, पूर्व कैबिनेट सदस्य, एएमयू
चौधरी इफ्राहीम।- फोटो : CITY OFFICE
नदीम अंसारी- फोटो : CITY OFFICE