फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बाइबिल सुनकर ओएलएफ स्कूल की तरुवर स्टेंसलॉस ने ली अंतिम सांस

विज्ञापन
अवर लेडी फॉतिमा स्कूल की सिस्टर स्टेंसला के निधन पर आयोजित शोकसभा में प्रार्थना करती महिलाएं। - फोटो : CITY OFFICE
विज्ञापन
अवर लेडी ऑफ फातिमा स्कूल की सिस्टर स्टेंसलॉस ने रविवार सुबह तीन बजकर 20 मिनट पर शहर के केके हॉस्पिटल में बाइबिल सुनते हुए अंतिम सांस ली है। उनके निधन की खबर पर विद्यालय परिवार, शिष्यों व समाज में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके शिष्य रहे शहर के तमाम डॉक्टर, एएमयू के प्रोफेसर, पूर्व एमएलसी विवेक बंसल, एएमयू कुलपति प्रो. तारिक मंसूर उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। बताते हैं कि वह अंतिम क्षणों तक सभी को आशीर्वाद देती रहीं तो इलाज से पहले विद्यालय का मार्गदर्शन करती रही हैं। सभी लोग उन्हें सिस्टर की जगह मां कहा करते थे। आज (सोमवार) दोपहर दो बजे विद्यालय परिसर में ही उनकी अंत्येष्टि होगी।
विज्ञापन

चार दिनों से सिस्टर स्टेंसलॉस तबियत खराब होने के कारण शहर के केके हास्पिटल के आईसीयू वार्ड में भर्ती थीं। शनिवार रात साढ़े 11 बजे उन्होंने मिलने आए लोगों से बात की। उन्होंने गॉड ब्लेस यू का आशीर्वाद भी दिया था। कहा कि, तुम सब जाओ...अब समय आ गया है। भगवान सभी का भला करे। इसके बाद ओएलएफ की प्रिंसिपल सिस्टर ज्योत्सना ने रात दो बजे बाइबिल पढ़ना प्रारंभ किया। जिसे वह ध्यान से सुन रही थीं। रात तीन बजकर 20 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। जैसे ही उनके निधन की सूचना फैली, वैसे ही समाज, विद्यालय परिवार, अन्य संस्थानों में शोक की लहर दौड़ गई।
आगरा से आए आर्कबिशप अल्बर्ट डिसूजा
सिस्टर स्टेंसलॉस के निधन की सूचना पर आगरा से आर्कबिशप अल्बर्ट डिसूजा, फादर जार्जपॉल, विद्यालय की पूर्व प्रिंसिपल सिस्टर दीप्ति, सिस्टर सोफी, कैथरीन सहित अन्य शिक्षण संस्थानों से भी प्रिंसिपल, सिस्टर, फादर, हेड मिस्ट्रेस आदि पहुंचे। दिनभर प्रार्थनासभा में लोगों का तांता लगा रहा।
विज्ञापन

सीबीएसई की मान्यता दिलाने में निभाई थी महत्वपूर्ण भूमिका
ओएलएफ स्कूल की नींव 1961 में आगरा के आर्कबिशप फादर डॉमिनिक अथाइड की प्रार्थना पर सुपीरियर मदर मैरी ने अलीगढ़ में कान्वेंट स्कूल के रूप में रखने की जिम्मेदारी ली। दोदपुर में किराये के एक कमरे से शुरुआत की। 1962 में स्कूल खोलने के लिए विभिन्न रिसोर्स जुटाए गए। इसके बाद रामघाट रोड पर जमीन खरीदकर स्कूल बनाने का कार्य प्रारंभ कराया गया। 1967 में यहां पहला ब्लॉक बनकर तैयार हुआ और विद्यालय की कक्षाएं यहां शिफ्ट की गईं। इस बीच सिस्टर स्टेंसलॉस को विद्यालय को सीबीएसई से मान्यता दिलाने का कार्यभार सौंपा गया। 1969 में विद्यालय को मान्यता मिल गई, जो 1978 में स्थायी हो गई। जबकि 1971 में पहले बैच के विद्यार्थियों ने हाईस्कूल स्तर की परीक्षा दी और बेहतर परिणाम हासिल किये। सिस्टर के अथक परिश्रम, अनुभव और प्रेमभाव के चलते शिक्षा का इस मंदिर में अन्य समाज के लोग भी अपने बच्चे को दाखिला दिलाने के लिए पहुंचने लगे। एएमयू कुलपति प्रो. तारिक मंसूर और पूर्व एमएलसी विवेक बंसल सहित कई हस्तियां सिस्टर स्टेंसलॉस के शिष्य रहे हैं।
2018 में अमर उजाला के कार्यक्रम में सिस्टर स्टेंसलॉस व एएमयू कुलपति हो गए थे भावुक
शिक्षा के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान देने पर अमर उजाला ने शिक्षक दिवस पर सिस्टर स्टेंसलॉस का सम्मान किया था। इस कार्यक्रम में जब एएमयू कुलपति प्रो. तारिक मंसूर से सिस्टर स्टेंसलॉस मिली तो भावुक हो गईं। पुरानी बातों को याद कर दोनों ने एक दूसरे के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की थीं।

ओएलएफ सिस्टर स्टेंसलॉस साथ में वीसी प्रोफेसर तारिक मंसूर और डीआईजी डॉ प्रीतिंदर सिंह। फाइल फोटो- फोटो : CITY OFFICE

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें