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अपनों ने ठुकराया तो वृद्धाश्रम को घर बनाया: किसी को भाई भटकने के लिए छोड़ गया तो किसी को पुलिस, इंतजार है इनको

Fri, 29 Nov 2024 02:03 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

यहां हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे एक दर्दनाक कहानी छिपी है। अपनों के ठुकराए वृद्धों ने अब वृद्धाश्रम को ही अपना घर बना लिया है। सीने में परिजनों से बिछड़ने के टीस दबाए सब अपनी आखिरी यात्रा का इंतजार कर रहे हैं।
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दाऊजी सेवाधाम वृद्धाश्रम में कीर्तन के समय भजन सुनते वृद्धजन - फोटो : संवाद
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विस्तार
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ढाई साल पहले भाई रेलवे स्टेशन पर छोड़ गया। समझ नहीं आ रहा था कहां जाऊं। इधर-उधर भटक रही थी तो पुलिस वाले वृद्धाश्रम छोड़ गए। तब से आज तक किसी ने सुध नहीं ली। यह बताते हुए कमालपुर निवासी 58 वर्षीय नजमा सिद्दीकी का गला रुंध गया और वह रोने लगीं।

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कुछ ऐसी ही अनकही कहानियां हैं शहर के वृद्धाश्रमों में रह रहे वृद्धजनों की... किसी को घर वालों ने निकाल दिया है तो किसी का अब इस दुनिया में कोई नहीं है। पड़ोसियों-रिश्तेदारों ने ठुकरा दिया। जब शरीर ने साथ छोड़ दिया और बीमारियों ने जकड़ लिया तो वृद्धाश्रम उनके बुढ़ापे का सहारा बन गया।

दाऊजी सेवाधाम वृद्धाश्रम में रह रहे अलीगढ़ निवासी 68 वर्षीय भूषण बन्ना की कहानी भी कुछ ऐसी है। भूषण बन्ना मानसिक रूप से थोड़ा अस्वस्थ हैं। वे कोई काम नहीं करते थे। पत्नी टीचर है। पत्नी ने यह कहते हुए घर से निकाल दिया कि कोई काम नहीं करते हो। ऊपर से बैठकर हमारी कमाई खाते हो। यहां रहोगे तो बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। तब से आज तक वह वृद्धाश्रम में ही रह रहे हैं। दो महीने हो गए आज तक कोई मिलने नहीं आया।

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70 वर्षीय शांति देवी ने शादी नहीं की। वह बताती हैं कि पहले मैं पूर्व विधायक विवेक बंसल के यहां काम करती थी। अब पैर काम नहीं करते। बीमारी की वजह से काम छोड़ दिया था। रिश्तेदारो ने भी मुंह मोड लिया तो वृद्धाश्रम आ गई। एक भतीजी है जो नोेएडा में जॉब करती है। साल में कभी उसका दिल होता है तो मिलने आ जाती है। उससे मिलकर पुरानी यादें ताजा हो जाती है।

विनोद शर्मा आर्मी से सेवानिवृत्त हैं। बुढ़ापे में नोकझोंक होने पर घर छोड़ा तो बरौला बाईपास स्थित श्री सियाराम वृद्धाश्रम में रहने लगे। वृद्धाश्रम संचालक ने बताया कि नौ महीने से यहां रह रहे थे। जब पेंशन मिलने लगा तो कुछ दिनों पहले बेटा लेने आया और घर बुलाकर ले गया।
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मनोरंजन के लिए है टीवी, शाम कीर्तन करते है वृद्धजन

यहां हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे एक दर्दनाक कहानी छिपी है। अपनों के ठुकराए वृद्धों ने अब वृद्धाश्रम को ही अपना घर बना लिया है। सब साथ मिलकर रहते हैं। मनोरंजन के लिए टीवी है, जहां सब बैठकर टाइम पास करते हैं। शाम में सभी मिलकर कीर्तन करते हैं। सीने में परिजनों से बिछड़ने के टीस दबाए सब अपनी आखिरी यात्रा का इंतजार कर रहे हैं।
कुछ महिलाएं रेलवे ट्रैक पर मिलीं तो कुछ को पुलिस वाले छोड़कर चले गए। अभी 23 महिलाएं और 2 पुरुष समेत 25 वृद्धजन यहां रह रहे हैं। उनका रेगुलर जांच कराया जाता है। नाश्ता-खाना का विशेष ध्यान रखा जाता है। - मोनू शर्मा, प्रभारी, दाऊजी सेवाधाम वृद्धाश्रम
हमारे यहां 11 महिला और 9 पुरुष समेत 20 वृद्धजन हैं। सबके रहने और खाने-पीने की समुचित व्यवस्था है। अगर पुलिस कोशिश करे तो इनमें से कई लोग अपने परिजनों से मिल सकते हैं। - सत्यदेव शर्मा, प्रभारी, श्री सियाराम वृद्धाश्रम
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