70 वर्षीय शांति देवी ने शादी नहीं की। वह बताती हैं कि पहले मैं पूर्व विधायक विवेक बंसल के यहां काम करती थी। अब पैर काम नहीं करते। बीमारी की वजह से काम छोड़ दिया था। रिश्तेदारो ने भी मुंह मोड लिया तो वृद्धाश्रम आ गई। एक भतीजी है जो नोेएडा में जॉब करती है। साल में कभी उसका दिल होता है तो मिलने आ जाती है। उससे मिलकर पुरानी यादें ताजा हो जाती है।
विनोद शर्मा आर्मी से सेवानिवृत्त हैं। बुढ़ापे में नोकझोंक होने पर घर छोड़ा तो बरौला बाईपास स्थित श्री सियाराम वृद्धाश्रम में रहने लगे। वृद्धाश्रम संचालक ने बताया कि नौ महीने से यहां रह रहे थे। जब पेंशन मिलने लगा तो कुछ दिनों पहले बेटा लेने आया और घर बुलाकर ले गया।
यहां हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे एक दर्दनाक कहानी छिपी है। अपनों के ठुकराए वृद्धों ने अब वृद्धाश्रम को ही अपना घर बना लिया है। सब साथ मिलकर रहते हैं। मनोरंजन के लिए टीवी है, जहां सब बैठकर टाइम पास करते हैं। शाम में सभी मिलकर कीर्तन करते हैं। सीने में परिजनों से बिछड़ने के टीस दबाए सब अपनी आखिरी यात्रा का इंतजार कर रहे हैं।
कुछ महिलाएं रेलवे ट्रैक पर मिलीं तो कुछ को पुलिस वाले छोड़कर चले गए। अभी 23 महिलाएं और 2 पुरुष समेत 25 वृद्धजन यहां रह रहे हैं। उनका रेगुलर जांच कराया जाता है। नाश्ता-खाना का विशेष ध्यान रखा जाता है। - मोनू शर्मा, प्रभारी, दाऊजी सेवाधाम वृद्धाश्रम
हमारे यहां 11 महिला और 9 पुरुष समेत 20 वृद्धजन हैं। सबके रहने और खाने-पीने की समुचित व्यवस्था है। अगर पुलिस कोशिश करे तो इनमें से कई लोग अपने परिजनों से मिल सकते हैं। - सत्यदेव शर्मा, प्रभारी, श्री सियाराम वृद्धाश्रम