एटा चुंगी के पास सड़क पर शव रखकर हंगामा करते परिजन
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बुलडोजर कार्रवाई व मुआवजे की उठी मांग
इस खबर पर सीओ द्वितीय, महुआ खेड़ा व गांधीपार्क पुलिस के साथ-साथ एसीएमओ डॉ.एसके जैन भी टीम के साथ पहुंच गए। भीड़ ने कई बार अंदर घुसकर नर्सिंग होम में तोड़फोड़ व डॉक्टर को खींचने का प्रयास किया। पुलिस ने उन्हें रोका तो कई बार नोकझोंक हुई। इसी दौरान हॉस्पिटल पर बुलडोजर चलाने, पीड़ित परिवार को मुआवजा दिलाने व आरोपी की गिरफ्तारी की मांग उठी। पहली बार वार्ता के क्रम में साढ़े सात बजे हंगामा शांत कर जाम खोला गया। आधा घंटे की बातचीत के बाद फिर बात बिगड़ गई और फिर से जाम लगा दिया। बाद में नौ बजे एसीएमओ द्वारा दिए गए ठोस आश्वासन पर भीड़ शांत हुई। तब शव को गांव ले जाया गया।
हंगामा-बातचीत में उछले यह आरोप
हंगामा व अधिकारियों से बातचीत के दौरान परिजनों की ओर से आरोप लगाए गए कि ऑपरेशन के बाद टांके नहीं लगाए गए थे। यूं ही पट्टी बांध दी गई थी। साथ में ऑपरेशन में किसी तरह आंत में कट लग गया था, जिस दिन दिल्ली भेजने की बात हुई। उस दिन ऑपरेशन वाले स्थान से खून बह रहा था। जब सवाल जवाब किए गए तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया।
नवजात ननिहाल में, तीन बच्चों का हाल बेहाल
मां की मौत के बाद शव आने की खबर पर महिला के तीन बड़े बच्चों में 15 साल का कन्हैया, 12 का शिवा व सात साल की बेटी कामिनी अस्पताल पर पहुंच गए थे। तीनों का हाल बेहाल था। हालांकि जो बेटी पैदा हुई। वह अभी ननिहाल में छोड़ी गई है।
सील सहित ये तय की गई कार्रवाई
परिजनों से बातचीत के बाद एसीएमओ डॉ.एसके जैन ने ऑपरेशन व उपचार के दस्तावेज देखते हुए अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही मानी है। इसी आधार पर अस्पताल को तत्काल सील किया गया। इस दौरान वहां भर्ती दो प्रसूताओं को सरकारी अस्पताल में भिजवाया गया। वहीं, पुलिस को परिजनों द्वारा दी गई तहरीर पर एफआईआर दर्ज की जा रही है। अस्पताल के संचालक डॉ.शारिक सहित दो लोगों को महुआ खेड़ा पुलिस ने हिरासत में लिया है। एसीएमओ के अनुसार मामले में एफआईआर पर वे अपनी टिप्पणी भी देंगे और दिल्ली से पोस्टमार्टम रिपोर्ट मंगाई जाएगी। वह जांच का हिस्सा बनेगी।