खादी आश्रम की हरदुआगंज स्थित बेशकीमती भूमि के किरायानामा में बदनीयती, धोखा और व्यक्ति विशेष को लाभ देने की जिम्मेदार क्षेत्रीय श्रीगांधी आश्रम कमेटी पर कार्रवाई अब खादी ग्रामोद्योग स्तर से की जाएगी। प्रशासन स्तर से इस संबध्ंा में अपनी जांच रिपोर्ट खादी-ग्रामोद्योग आयोग को भेजी जा रही है। उधर, आयोग के मंडलीय कार्यालय से इस प्रकरण में रिपोर्ट मिलने का इंतजार है। संकेत हैं कि वहां से भी सख्त कार्रवाई की तैयारी है।
एसडीएम कोल संजीव ओझा ने शुक्रवार को ही अपनी जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपी है। जिसमें जिलाधिकारी स्तर से यह तय किया गया है कि किरायानामा वाली भूमि पर पहला भार आयोग का है। आयोग से इस बाबत पत्र भी मिला था। उसी आधार पर जांच कराई गई थी। डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि हमने जांच पूरी करा दी है।
अब रिपोर्ट आयोग को भेजी जा रही है। आयोग ही अग्रिम कार्रवाई तय करेगा। बता दें कि 2 सितंबर को खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग मेरठ के मंडलीय निदेशक ने जिलाधिकारी को संबोधित पत्र में कहा था कि ये किरायानामा सरकारी कार्यालयों को धोखा देकर किया गया है। इसे निरस्त किया जाये।
इसके बाद 7 सितंबर को आयोग ने सोसायटी उप निबंधक आगरा को पत्र भेजकर क्षेत्रीय श्रीगांधी आश्रम कमेटी को भंग कर नई कमेटी की व्यवस्था करने की भी संस्तुति की थी। हरदुआगंज के पूर्व चेयरमैन राजेश यादव की शिकायत पर आयोग व जिला प्रशासन 22 अगस्त से ही सक्रिय है। 22 अगस्त को ही मौके पर निर्माण रुकवाकर एसडीएम ने जांच शुरू की थी। बाद में आयोग के दखल के बाद प्रशासन की सक्रियता बढ़ गयी।
जांच के दौरान हो गया बिजली कनेक्शन
22 अगस्त को एसडीएम कोल संजीव ओझा ने मौके पर निर्माण रुकवाकर जांच शुरू की थी। उसके कुछ दिन बाद ही लोरिक राज ने उक्त भूमि पर अपने नाम 2 किलो वाट का घरेलू विद्युत कनेक्शन ले लिया है। जानकारी मिलते ही पूर्व चेयरमैन राजेश यादव ने डीएम सहित अधिशासी अभियंता से लेकर दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी तक सभी अफसरों को शिकायत भेजी हैं। इसमें जेई की मिलीभगत बताते हुए जेई को निलंबित कर कनेक्शन निरस्त करने की मांग की गई है। उधर, राजेश यादव ने शुक्रवार को भी डीएम से मिलकर भी ये बात बताई है।