जिले में रेमडेसिविर इंजेक्शन की किल्लत है। निजी अस्पताल धड़ल्ले से इस इंजेक्शन के इस्तेमाल को लेकर मरीजों के तीमारदारों को पर्चा पकड़ा रहे हैं। एडीएम वित्त एवं राजस्व विधान जायसवाल ने इस संबंध में वरुण हॉस्पिटल को नोटिस जारी किया है। संचालक से अधिक खपत को लेकर जवाब तलब किया गया है।
एडीएम वित्त विधान जायसवाल ने बताया कि रेमडेसिविर इंजेक्शन की शासन से ही आपूर्ति कम हो रही है। जबकि जिले में 200 से 250 इंजेक्शन की प्रतिदिन की खपत है। 80 से 100 इंजेक्शन ही मिल पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि कुछ अस्पताल रेमडेसिविर का अधिक प्रयोग कर रहे हैं। इनमें वरुण अस्पताल भी शामिल है। संचालक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
रेमडेसिविर के विकल्प हैं डेक्सामेथोसोन व एस्टरॉयड इंजेक्शन
रेमडेसिविर इंजेक्शन की बाजार में कालाबाजारी भी हो रही है। इसको लेकर सीएमओ डा. बीपी कल्याणी, जेएन मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. हारिस खान, प्रिंसीपल डॉ. शाहिद सिद्दीकी ने कहा है कि रेमडेसिविर इंजेक्शन कोई जादुई दवा नहीं है।
सभी कोरोना मरीजों के लिए इसकी जरूरत नहीं है। सिर्फ जो मरीज सामान्य से गंभीर लक्षणों की ओर जाते हैं, उनको ही इंजेक्शन दिया जाना चाहिए। रेमडेसिविर इंजेक्शन के अलावा बाजार में उपलब्ध डेक्सामेथोसोन व एस्टरॉयड इंजेक्शन हैं। इनका भी उपयोग करने से अच्छा परिणाम प्राप्त होगा। यह बात उन्होंने डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार कही।