अपनी शादी की चिंता में पिता की मौत से गुमसुम यह बेटियां।
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पिता ने जीतोड़ मेहनत कर पाई-पाई जुटाई थी कि बेटियों के हाथ शान से पीले करेगा। विवाह तय कर दिया। 24 नवंबर को दोनों बेटियों की बारात दरवाजे आनी है। पर बैंकों ने उसके 500-1000 के पुराने नोट नहीं बदले।
बाजार में भी कोई पुराने नोट पर शादी का सामान देने को तैयार नहीं था। रविवार को जब फर्नीचर खरीदने गए बेटे खाली हाथ लौट आए तो सदमे में पिता की मौत हो गई।
गांव चिरौली निवासी कुंवरपाल पुत्र इंद्रजीत मजदूर था। दो बेटियाें मुंद्रा कुमारी एवं प्रीति कुमारी की खैर के गांव बिसारा से बारात आनी है। परिजनों के अनुसार नोटबंदी के आदेश के बाद से कुंवरपाल लगातार बैंक के चक्कर लगा रहा था, लेकिन बैंक में पुराने बड़े नोट नहीं बदले गए। रविवार को दोनाें बड़े बेटे जयकिशोर, दीपक खैर में फर्नीचर की दुकान से पलंग, अलमारी खरीदने गए थे।
दीपक के अनुसार दुकानदार ने पुराने नोट पर सामान देने से इनकार कर दिया। लौटकर पिता को बताया तो उनको सदमा लगा। हालत बिगड़ती देख वे रिश्तेदारों के साथ खैर के एक डाक्टर के यहां ले गए। डाक्टर ने कुंवरपाल को मेडिकल कालेज ले जाने को कहा। मेडिकल कालेज में उपचार शुरू होते ही उनकी मृत्यु हो गई।
इस मौत से परिवार टूट गया है। 24 को दरवाजे बारात आनी है और आंगन मंे परिवार के मुखिया की लाश पड़ी थी। दोनों बेटियां होश खो चुकी हैं जिनकी शादी की टेंश्ान में पिता की मौत हुई।