नूर फातिमा व उजैफ को उल्टी-दस्त होने पर परिजन मलखान सिंह जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां पर्चा बनाने और आभा आईडी बनाने में लगभग 30 मिनट लग गए। बाद में परिजन दोनों बच्चों को लेकर इमरजेंसी पहुंचे। यहां इलाज में देरी से नूर फातिमा की मौत हो गई थी।
अलीगढ़ जिला अस्पताल में पर्चा बनाने में देरी से डायरिया पीड़ित नूर फातिमा (05) की 12 जुलाई को मौत हो गई थी। रात में परिजनों ने उसे सुर्पुद-ए-खाक कर दिया। इमरजेंसी में भर्ती नूर के दो साल के भाई उजैफ की हालत में सुधार बताया जा रहा है। नूर की मौत की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की जाएगी।
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हड्डी गोदाम निवासी नौशाद व फरीन के दो बच्चे नूर फातिमा व उजैफ कुछ दिनों से डायरिया से पीड़ित थे। 12 जुलाई की दोपहर करीब 12 बजे परिजन दोनों को मलखान सिंह जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां पर्चा बनाने और आभा आईडी बनाने में लगभग 30 मिनट लग गए। बाद में परिजन दोनों बच्चों को लेकर इमरजेंसी पहुंचे। यहां इलाज में देरी से नूर फातिमा की मौत हो गई। नूर के भाई उजैफ को बच्चा वार्ड में भर्ती करा दिया गया।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विभव जैन ने कहा कि उजैफ की तबीयत में सुधार हो रहा है। पानी की कमी पूरी कर ली गई है। अभी भी दस्त व उल्टी हो रहे हैं। दो से तीन दिन में उसकी हालत में सुधार हो जाएगा। मामा आसिफ ने बताया कि बच्चे की हालत में धीरे-धीरे सुधार आ रहा है। नूर फातिमा को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया है।
अस्पताल में भर्ती उजैफ का उपचार किया जा रहा है। उसकी हालत में सुधार आ रहा है। रही बात मासूम बच्ची की मौत की तो इसकी जांच होगी। अभी शहर से बाहर हूं। आने के बाद तीन सदस्यीय टीम गठित की जाएगी। तीन दिन में जवाब मांगा जाएगा। - डॉ. जगवीर सिंह वर्मा, सीएमएस, जिला अस्पताल