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लॉक डाउनः बर्फ कारखाने पड़े ठंडे, आइसक्रीम भी गई पिघल इस बार कोई भी बर्फ खाना शुरू नहीं हो सका इन में काम करने वाले कारीगर भी खाली बैठे हुए हैं

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दिनेश गुप्ता बर्फ खाना मालिक - फोटो : AMAR UJALA
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दीपक शर्मा अलीगढ़। महामारी के चलते हुए लॉक डाउन में इस बार गर्मी के चरम सीजन में भी आइसक्रीम और बर्फ बनाने वाले कारखाने ठंडे पड़े हुए हैं। इनका कारोबार बिल्कुल ठप पड़ा हुआ है। जबकि अन्य वर्षो में इस समय है इनके पास मांग बहुत अधिक होती है और सप्लाई करने के लिए माल कम पड़ जाता है। व्यापार से जुड़े मालिक लोग ही नहीं बल्कि इन कारखानों में काम करने वाले कारीगरों को भी आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कारखानों में बनने वाली बर्फ का इस्तेमाल गन्ने के रस की ढकेल, शिकंजी, जूस आदि शीतल पेयों को ठंडा करने के लिए किया जाता है। लेकिन इस बार यह स्ट्रीट वेंडर भी अपने स्टॉल नहीं लगा पा रहे हैं। अलीगढ़ में बर्फ बनाने की करीब 15 कारखाने हैं। इनमें सैकड़ों कारीगर काम करते हैं । लेकिन इन दिनों वे खाली बैठे हुए हैं। शहर के पुराने बर्फ खाना संचालक दुबे के पड़ाव निवासी दिनेश गुप्ता ( यह गुजरे जमाने के सुपरस्टार भारत भूषण के भतीजे भी हैं) कहते हैं उन्होंने अपने जीवन में इस प्रकार गर्मियों में वीरानी कभी नहीं देखी। बर्फ खाने का सीजन 3 महीने का होता है। इस दौरान एक बर्फ की सिल्ली ₹100 तक बिक जाती है। लेकिन इस बार सन्नाटा है। वह खुद दीपावली पर अपना बरफ खाना बंद कर देते हैं और होली पर शुरू कर देते हैं। इस बार गर्मियां निकली जा रही है और बर्फ खाना पूरी तरह बंद है। यही स्थिति स्थानीय स्तर पर बनने वाली आइसक्रीम के काम की है। लॉक डाउन के चलते मूवमेंट न होने की स्थिति में यह कारखाने में बंद पड़े हुए हैं। हालांकि अब कारखानों के मालिक लॉक डाउन 4 में मिली थोड़ी राहत के बाद कारखानों के संचालन के संबंध में अब विचार कर रहे हैं।
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