कुराना गांव में लंपी से पीड़ित गाय को देखते अपर मुख्य सचिव पशुधन डॉ. रजनीश दुबे
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पशु पालन विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. रजनीश दुबे ने मंगलवार को सांसद सतीश गौतम के साथ टप्पल ब्लॉक क्षेत्र के कई गांवों में पहुंचकर लंपी वायरस की बीमारी से पीड़ित पशुओं के बारे में पशुपालकों से जानकारी ली। पशु चिकित्सकों से उनके समुचित उपचार करने को कहा। उन्होंने कहा कि जनपद में कोई भी बाहरी पशु प्रवेश न करे, ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए।
ग्राम कुराना में चौपाल के माध्यम से उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सुनते हुए जल्द समाधान कराने के निर्देश दिए। लंपी रोग की रोकथाम के लिए पशुपालकों को जागरूक किया। गांव कुराना में भ्रमण के दौरान उन्हें 79 गोवंश लंपी रोग से ग्रसित मिले। चौपाल में अपर मुख्य सचिव ने ग्रामीणों को लंपी स्किन रोग के संबंध विस्तृत चर्चा करते हुए बताया कि यह बीमारी वैक्टर बोर्न वाइरल डिजीज है, जो गोवंशीय एवं महिष वंशीय पशुओं को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि यह बीमारी भारतीय नस्ल की देसी गायों एवं भैसों को रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होने के कारण कम प्रभावित करती है, जबकि विदेशी नस्ल एवं क्रॉस ब्रीड गोवंश को अधिक प्रभावित करती है। उन्होंने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सीबी सिंह को निर्देशित किया कि इस बीमारी के उपरांत स्वस्थ हो चुके समस्त गोवंश की प्रजनन क्षमता बढ़ाए जाने एवं पूर्ण स्वस्थ रहने के उद्देश्य से बहुउद्देशीय शिविरों का प्राथमिकता से आयोजन किया जाए। पशुपालकों से अपील की कि वे अपने पशुओं के बांधने वाले स्थान पर नियमित साफ-सफाई एवं चूने का छिडकाव कराएं।
इसके अतिरिक्त सोडियम हाईपोक्लोराइड का छिड़काव कराए जाने के लिये जिला पंचायत राज विभाग एवं चिकित्सा विभाग को भी निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि जब भी लंपी रोग बीमारी से ग्रसित कोई भी पशु प्रभावित देखें तो तत्काल नजदीकी पशु चिकित्सालय पर जाकर पशुओं का उपचार कराएं। उन्होंने पशुपालकों को मत्स्य पालन में रुचि लेने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि इससे उनकी आय में वृद्धि होगी। सांसद सतीश गौतम ने कहा कि केंद्र एवं प्रदेश सरकार लंपी रोग की रोकथाम पर पैनी निगाह रखी जा रही है। पशुपालन विभाग के सहयोग से जनपद में बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया है। उन्होंने अपील की कि पशुपालक किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और वैक्सीनेशन कार्य में अपना पूर्ण सहयोग करें। उन्होंने अफसरों से भी गांव-गांव जागरुकता शिविर लगानेे के निर्देश दिए।
अपर निदेशक पशुपालन विभाग डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि जिले में 5659 गोवंश रोगग्रस्त हुए हैं जबकि 1943 गौवंश पूर्णत: स्वस्थ हो चुके हैं। इस बीमारी में 0.8 प्रतिशत ही मृत्यु दर रिकॉर्ड की गई है जो कि अन्य प्रदेशों की तुलना में काफी कम है। 1.20 लाख गोवंशीय पशुओं का बीमारी से बचाव के लिए टीकाकरण किया जा चुका है। इस मौके पर सीडीओ अंकित खंडेलवाल आदि मौजूद रहे।