अलीगढ़ में अवैध पशु कटान की समस्या गंभीर स्तर तक पहुंच गई है, पर अब इसमें बदलाव आने वाला है। पशुओं के खून, सड़े अंश, हड्डियों तथा चर्बी से होने वाले जल व वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या अदालत तक पहुंच गई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने इसे गंभीरता से लेते हुए इस बारे में सुनवाई शुरू कर दी है।
दिल्ली के सुदीप डे और शैलेष सिंह ने मामले को एनजीटी में उठाया था। इसके बाद ही एनजीटी ने अलीगढ़, संभल, गाजियाबाद और बुलंदशहर के सरकारी स्लाटर हाउसों, मीट एक्सपोर्ट यूनिटों, वाटर ट्रीटमेंट प्लांटों की संख्या आदि की जानकारी मांगी है। यह भी पूछा है कि वायु प्रदूषण रोकने तथा दूषित जल के निस्तारण की क्या व्यवस्था है।
एनजीटी ने 25 जनवरी 2016 को इस केस को स्वीकारा है। जिसकी केस नंबर 38 / 2016 है। इस मामले में अदालत ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रतिवादी बनाया है। इसके अलावा जिलाधिकारी अलीगढ़, बुलंदशहर, गाजियाबाद और संभल से भी जवाब मांगा गया है। इनके सरकारी वकीलों सावित्री पांडेय, अजमा परवीन, प्रदीप मिश्रा, दलीप ध्यानी, बीवी निरेन, अतिन शंकर रस्तोगी से इस संबंध में अपना पक्ष रखने को कहा गया है। इस मामले में 24 फरवरी को सुनवाई होगी।
बता दें कि अलीगढ़ नगर निगम का एक मात्र स्लाटर हाउस जनवरी 2015 से बंद है। आरोप है कि पुराने शहर में अवैध पशुओं का कटान लगातार जारी है। अमर उजाला इससे हो रहे वायु और जल प्रदूषण के मसले को निरंतर गंभीर से उठाता रहा है। इससे पहले नालों की सिल्ट सफाई की समस्या को लेकर अमर उजाला ने मुहिम छेड़ी थी, जिस पर उद्योग व्यापार संगठन के मंडल अध्यक्ष अनुराग गुप्ता ने एनजीटी में अपील की थी। इस मामले में भी सुनवाई जारी है।