एक तरफ कोरोना संक्रमण काल में नियमित पढ़ाई बाधित रही। इस दौरान बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाने के अलावा कोई और विकल्प ही नहीं मिला। इसी बीच नई शिक्षा नीति के फैसले से उन छात्र-छात्राओं को राहत मिली है। जो दो साल या उससे अधिक समय के अंतराल के बाद नियमित कक्षा लेना चाहते हैं। इस वर्ष जिले में ऐसे छात्र-छात्राओं ने विभिन्न डिग्री कॉलेजों में दाखिला भी लिया है। हालांकि संख्या कम है, लेकिन वर्ष 2021-22 के सत्र में इस संख्या में इजाफा होने वाला है। नई शिक्षा नीति से देश के युवाओं की किस्मत बदलने में प्रतिबंध का हटना भी काफी कारगर सिद्ध होगा।
बता दें कि नई शिक्षा नीति से पहले अगर किसी छात्र-छात्रा ने दो वर्ष तक पढ़ाई नहीं की तो संस्थागत (नियमित) प्रवेश नहीं मिलता था। दो वर्ष या उससे अधिक अंतराल वाले छात्र-छात्राओं के पास दूरस्थ शिक्षा (डिस्टेंस लर्निंग) ही एकमात्र विकल्प था। इसके अलावा डिग्री कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में नियमित दाखिला नहीं मिलता था। जुलाई 2020 में नई शिक्षा नीति को कैबिनेट ने मंजूरी दी। इसके बाद नई शिक्षा नीति का धीरे-धीरे पालन शुरू हुआ। नई शिक्षा नीति आई तो इससे दो वर्ष अंतराल के बाद नियमित दाखिले पर लगा प्रतिबंध हट गया। ऐसे मेें अब छात्र-छात्राएं अंतराल के बावजूद शपथपत्र देकर नियमित दाखिला ले सकते हैं। यह नियम आया तो जागरूक युवाओं ने दाखिले भी लिए। विगत दिनों से दाखिले की प्रक्रिया का अंतिम चरण चल रहा है। अमर उजाला ने पड़ताल की तो इस नियम का फायदा लेने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या भले ही कम हो, लेकिन आवेदन हुए हैं। चूंकि नई शिक्षा नीति की जागरूकता अभी बाकी है। इसीलिए सत्र 2021-22 में दाखिला लेने वालों की संख्या बढ़ेगी। इसके चलते घर बैठे छात्र-छात्राओं की जिंदगी नई शिक्षा नीति से संवरेगी।
- 2017 में बीएससी फाइनल की थी। 2019 तक कहीं दाखिला नहीं लिया तो नियमित दाखिले की आस ही छोड़ दी थी। कोरोना संक्रमण काल में नई शिक्षा नीति आई तो इसके बारे में जानकारी की। फिर पता चला कि शपथपत्र देकर दाखिले ले सकते हैं। इसका लाभ लेते हुए एलएलबी में दाखिला लिया है।
-मुनेश कुमार पुत्र ब्रह्मदेव सिंह, नागर, अतरौली
-नई शिक्षा नीति वास्तव में देश के भविष्य के लिए कारगर साबित होगी। गैप ईयर का नियम खत्म हुआ तो इसको युवाओं ने हाथों हाथ लिया है। कई दाखिले भी हुए हैं। हमने छात्र-छात्राओं से गैप ईयर का शपथपत्र भी लिया है।
-डॉ. पंकज कुमार वार्ष्णेय, प्राचार्य श्री वार्ष्णेय कॉलेज