इन मुकदमों में सरकारी अफसरों की ओर से बेहद कमजोर पैरवी एक नमूना मात्र है। अदालतें लगातार पुराने मुकदमों के निस्तारण में रुचि लेते हुए निर्देश जारी कर रही हैं, मगर संबंधित अफसरों के स्तर से मुकदमों में रुचि नहीं ली जा रही।
दिल्ली तक है आपूर्ति
जिले के टप्पल, गोंडा और गभाना आदि क्षेत्रों से रोजाना दूध, खोवा व पनीर की आपूर्ति ट्रेनों, बसों व निजी साधनों से दिल्ली तक होती है। आए दिन विभाग इनकी जांच व कार्रवाई का दावा करता है। मगर अदालतों में पहुंचने पर गवाही के अभाव में मिलावटखोरों के खिलाफ कोई सख्त और बड़ी कार्रवाई नहीं हो पाती है।
डीएसओ निस्तारित कराएंगे पुराने मुकदमे
विशेष अभियोजन अधिकारी सत्यानंद सिंह बताते हैं कि पिछले दिनों डीएम की अध्यक्षता में इस संबंध में हुई मीटिंग में पुराने खाद्य अधिनियम के 20 से 22 ऐसे मुकदमे रखे गए हैं। जिनमें गवाह नहीं मिल रहे। इनके निस्तारण के लिए डीएसओ को निर्देशित किया गया है। वे अदालत में साक्ष्य पेशी का काम पूरा करा कर मुकदमे निस्तारित कराएंगे।
- 20 मुकदमे पुराने अधिनियम में अदालत में लंबित
- 100 मुकदमे नए अधिनियम में अदालत में लंबित
- 350 मुकदमों का सालाना एडीएम कोर्ट में निस्तारण
ये हैं एक वर्ष की कार्रवाई के आंकड़े
- 266 निरीक्षण व 55 छापे दूध पर किए गए
- 88 निरीक्षण व 12 छापे खोवा पर किए गए
- 67 नमूने दूध के अधोमानक व मिलावटी पाए
- 32 नमूने खोवा के अधोमानक व मिलावटी पाए