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मिलावटखोरी: कानूनी लड़ाई शुरू होते ही विभाग डाल देता है हथियार, मुकदमा दर्ज करा कर नहीं पहुंचता गवाही देने

Tue, 20 May 2025 12:42 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

हाल में ऐसे ही 23 वर्ष पुराने एक मुकदमे में गवाही के अभाव में अधोमानक खोवा बिक्री के आरोपी दुकानदार को बरी किया गया है। नमूने भरने के बाद मामले दर्ज होते हैं, पर अफसर गवाही पर नहीं पहुंचते हैं।
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नमूने भरते अधिकारी प्रतीकात्मक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अलीगढ़ का खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग मिलावटखोरी रोकने के लिए लगातार नमूने भर कर मामले दर्ज कर रहा है,मगर यह लड़ाई कानून की दहलीज पर पहुंचते-पहुंचते दम तोड़ती नजर आती है। अफसर अदालत में गवाही देने के बजाय हथियार डाल देते हैं। यही वजह है कि मिलावटखोरी से जुड़े मुकदमे कोर्ट में लंबित चल रहे हैं। अब न्यायालय ने गवाही के बिना उन पर निर्णय लेना शुरू कर दिया है। हाल में ऐसे ही 23 वर्ष पुराने एक मुकदमे में गवाही के अभाव में अधोमानक खोवा बिक्री के आरोपी दुकानदार को बरी किया गया है।

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मामला 30 अक्टूबर 2002 का है। अलीगढ़ से सुबह 6 बजे खाद्य निरीक्षक आरसी गुप्ता जट्टारी बस अड्डे स्थित घांघोली टप्पल निवासी विकास की दुकान पर पहुंचे। जहां दुकानदार के पास 2002-03 का कोई लाइसेंस नहीं था। नियमानुसार नमूने के लिए 750 ग्राम खोवा 37.50 रुपये देकर खरीदा गया। इसे जांच के लिए लखनऊ भेजा गया। जांच रिपोर्ट में अधोमानक यानी फैट की मात्रा 30 फीसदी कम पाई गई। इसके तहत अपमिश्रण खाद्य अधिनियम के तहत परिवाद अदालत में दर्ज कराया गया। 

मामले में ट्रायल के लिए गवाह आरसी गुप्ता, सहयोगी सुरेश चंद्र व सतीश चंद्र तलब किए गए। मगर आज तक कोई अदालत में गवाही देने हाजिर नहीं हुआ। बार-बार सूचना के बाद भी कोई जवाब नहीं आया। वहीं खुद आरोपी अदालत में हर तारीख पर हाजिर हुआ। अभियोजन पक्ष ने जांच रिपोर्ट को आधार बनाया, मगर अदालत ने किसी गवाह के न आने के आधार पर साक्ष्य साबित न होने के चलते विकास को बरी कर दिया। ये हालात तब हैं, जब खुद विभाग ने नमूना लिया और जांच में नमूना अधोमानक पाया गया। खुद ही विभाग ने मुकदमा दर्ज कराया।

विभाग अपने स्तर से मुकदमों में पैरवी करता है, मगर कई बार पुराने मुकदमों में गवाहों के सही पते न मिल पाने के कारण उन तक सूचना नहीं पहुंच पाती है। इस प्रकरण में भी कुछ ऐसा ही रहा होगा। इसमें अपील के प्रयास होंगे।- दीनानाथ यादव, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन।

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मुकदमों में रुचि नहीं लेते अफसर

इन मुकदमों में सरकारी अफसरों की ओर से बेहद कमजोर पैरवी एक नमूना मात्र है। अदालतें लगातार पुराने मुकदमों के निस्तारण में रुचि लेते हुए निर्देश जारी कर रही हैं, मगर संबंधित अफसरों के स्तर से मुकदमों में रुचि नहीं ली जा रही।

दिल्ली तक है आपूर्ति
जिले के टप्पल, गोंडा और गभाना आदि क्षेत्रों से रोजाना दूध, खोवा व पनीर की आपूर्ति ट्रेनों, बसों व निजी साधनों से दिल्ली तक होती है। आए दिन विभाग इनकी जांच व कार्रवाई का दावा करता है। मगर अदालतों में पहुंचने पर गवाही के अभाव में मिलावटखोरों के खिलाफ कोई सख्त और बड़ी कार्रवाई नहीं हो पाती है।

डीएसओ निस्तारित कराएंगे पुराने मुकदमे
विशेष अभियोजन अधिकारी सत्यानंद सिंह बताते हैं कि पिछले दिनों डीएम की अध्यक्षता में इस संबंध में हुई मीटिंग में पुराने खाद्य अधिनियम के 20 से 22 ऐसे मुकदमे रखे गए हैं। जिनमें गवाह नहीं मिल रहे। इनके निस्तारण के लिए डीएसओ को निर्देशित किया गया है। वे अदालत में साक्ष्य पेशी का काम पूरा करा कर मुकदमे निस्तारित कराएंगे।
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ये है मुकदमों की स्थिति

  • 20 मुकदमे पुराने अधिनियम में अदालत में लंबित
  • 100 मुकदमे नए अधिनियम में अदालत में लंबित
  • 350 मुकदमों का सालाना एडीएम कोर्ट में निस्तारण

ये हैं एक वर्ष की कार्रवाई के आंकड़े
  • 266 निरीक्षण व 55 छापे दूध पर किए गए
  • 88 निरीक्षण व 12 छापे खोवा पर किए गए
  • 67 नमूने दूध के अधोमानक व मिलावटी पाए
  • 32 नमूने खोवा के अधोमानक व मिलावटी पाए
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