अब अलीगढ़ में एक जनपद-एक नदी अभियान के तहत नीम नदी के पुनरुद्धार की तैयारी पूरी कर ली गई है। दम तोड़ रही इस नदी को पुनर्जीवित करने के लिए 6.68 करोड़ रुपये का विस्तृत प्रोजेक्ट (डीपीआर) तैयार कर परियोजना निदेशक को भेज दिया गया है।
इस योजना के जरिये न केवल नदी का जलस्तर सुधरेगा, बल्कि पर्यावरण और खेती-किसानी को भी बड़ा लाभ मिलेगा। इस प्रोजेक्ट को मनरेगा और सिंचाई विभाग के संयुक्त समन्वय से पूरा किया जाएगा। योजना के तहत नदी के तल में कई साल से जमा कचरा और गाद को हटाया जाएगा। सिंचाई विभाग तकनीकी देखरेख करेगा।
नदी के पानी को रोकने और भूगर्भ जल को रिचार्ज करने के लिए जगह-जगह छोटे चेक डैम और सोख्ता गड्ढे बनाए जा सकते हैं। इससे आसपास के गांवों का जलस्तर भी ऊपर आएगा। नदी के किनारों को मजबूत किया जाएगा ताकि बरसात में मिट्टी का कटाव न हो। किनारों पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जाएगा, जिससे यह एक ''ग्रीन कॉरिडोर'' के रूप में विकसित हो सके।
6.68 करोड़ रुपये की इस कार्ययोजना से नीम नदी का अस्तित्व बचेगा। नमामि गंगे इसका काम कराएगा, जबकि सिंचाई विभाग इस काम में तकनीकी सहयोग देगा। डीपीआर भेज दी गई है और बजट मिलते ही धरातल पर काम शुरू कर दिया जाएगा।- राजेंद्र कुमार, एक्सईएन, सिंचाई विभाग
अतिक्रमण मुक्त होगी नदी
राजस्व विभाग की मदद से नदी के बहाव क्षेत्र में हुए अवैध कब्जों को चिह्नित कर उन्हें हटाया जाएगा, ताकि नदी अपने पुराने स्वरूप में वापस लौट सके। मनरेगा के माध्यम से स्थानीय ग्रामीणों को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा। नदी में पानी रहने से आसपास के खेतों को सिंचाई के लिए प्राकृतिक स्रोत मिलेगा।