कक्षा 11 व 12 की गणित और कक्षा 12 की जीव विज्ञान की एनसीईआरटी की किताबें बाजार में उपलब्ध ही नहीं है। ऐसे में बच्चों को कक्षा 11 की 66 रुपये के सेट और कक्षा 12 के 87 रुपये वाले एनसीईआरटी सेट के बजाय अन्य प्रकाशनों की 300 से 600 रुपये वाली पुस्तकें खरीदनी पड़ रही हैं।
अमर उजाला ने शनिवार के अंक में नई और सस्ती के बजाय महंगी व पुरानी किताबों की बिक्री शीर्षक से एनसीईआरटी की किताबों के गड़बड़झाले की खबर को प्रकाशित किया था। इसी क्रम में और पड़ताल की गई तो पता चला कि बाजार में कक्षा 11 की रवि ऑफसेट प्रिंटर्स एंड पब्लिशर्स आगरा की 66 रुपये वाली गणित की किताब बाजार में उपलब्ध ही नहीं है। कक्षा 12 की इसी प्रकाशन की 41 रुपये की भाग एक और 46 रुपये वाली गणित की भाग दो वाली किताब भी बाजार में नहीं है। एक तो 2021 में 2019 संस्करण वाली महंगी किताबें बेची जा रही हैं। साथ ही इन किताबों की जगह दुकानदार अन्य प्रकाशनों की किताबें देने को मजबूर हैं। यह किताबें यूपी बोर्ड के आम विद्यार्थियों की पहुंच से बाहर हैं। मजबूरन विद्यार्थी पढ़ने के लिए या तो अपने विद्यालयों के पुरातन छात्रों से किताबें ले लेते हैं। अन्यथा की दृष्टि में 300 से 600 रुपये वाली किताबों को खरीदना पड़ता है। सरकार द्वारा यूपी बोर्ड के परीक्षार्थियों के लिए सस्ते दर पर उपलब्ध कराने वाली एनसीईआरटी की किताबों की योजना को माफिया पलीता लगाने में कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इसका खामियाजा विद्यार्थियों व अभिभावकों को उठाना पड़ रहा है।
शिक्षक बोले, कमीशनखोरी का है खेल, बड़ा गिरोह है सक्रिय
इस संबंध में शनिवार को राजकीय, वित्त विहीन और वित्त पोषित विद्यालयों के शिक्षकों से वार्ता की गई तो उनका कहना था कि यह सब कमीशनखोरी का खेल है। कोई बड़ा गिरोह सक्रिय है, जिसकी पहुंच अधिकारियों तक है। इसी कारण बाजार में एनसीईआरटी की किताबें नहीं मिलती हैं। मजबूरन हम बच्चों को पुरातन छात्रों से पुरानी किताबें लेने के लिए कहते हैं। इन्हीं किताबों से पढ़ाई कराते हैं, जो बच्चा सामर्थ्यवान होता है, वह महंगी किताब खरीद लेता है। लेकिन यह बात बिल्कुल सत्य है कि सरकार द्वारा चलाई जा रही सस्ती दरों पर किताब उपलब्ध कराने की योजना में माफिया पलीता लगा रहे हैं। इस समस्या का निदान होगा तो निश्चित ही विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा।
कुल दो लाख विद्यार्थी हैं कक्षा नौ से 12 तक
अलीगढ़। जनपद के विद्यालयों में कक्षा नौ से लेकर 12 तक यूपी बोर्ड के तकरीबन दो लाख विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं। वर्ष 2020 में दो लाख 23 हजार 635 विद्यार्थी कक्षा नौ से लेकर 12 तक पंजीकृत थे। अगर सभी विद्यार्थियों को सस्ती दर वाली एनसीईआरटी की किताबें नहीं मिल रही हैं तो इतने में से तकरीबन एक चौथाई ही महंगी किताबें खरीद लें तो भी अन्य प्रकाशनों की चांदी कट जाती है। इसके अलावा महंगी किताब पर कमीशन अधिक है। जबकि एनसीईआरटी की पंजीकृत किताब पर कमीशन नाममात्र है। इसीलिए दुकानदार भी इन किताबों को बेचने से बचते हैं।
- कक्षा 12 में एनसीईआरटी की गणित की दोनों किताबें 87 रुपये के लगभग आती हैं। एनसीईआरटी की पुस्तक नहीं मिमली तो मजबूरन 585 रुपये वाली की गणित की किताब खरीदी है।
- लवीसा भारद्वाज, छात्रा कक्षा 12, महेश चंद्र डिमांड इंटर कॉलेज कोटा, बरौली रोड।
- किसान परिवार से ताल्लुक रखता हूं। 2019-2020 में मैंने दसवीं की परीक्षा में आठवीं रैंक हासिल की थी। अब कक्षा 12 में एनसीईआरटी की पुस्तकें नहीं मिली तो मजबूरन गणित की किताब 300 रुपये, भौतिक विज्ञान की 415 रुपये और रसायन विज्ञान की किताब 460 रुपये में खरीदी है। दुकानदार एनसीईआरटी की सस्ते दर वाली किताबों को नहीं देते हैं।
-विनय कुमार, छात्र कक्षा 12, हीरालाल बारहसैनी इंटर कालेज।
- सरकार एनसीईआरटी किताबें उपलब्ध कराने का दावा कर रही है। लेकिन हकीकत तो यह है कि एनसीईआरटी की सस्ती दर वाली किताबें बाजार में उपलब्ध ही नहीं हैं। शिक्षक बच्चों से महंगी किताबें खरीदने की मना कर देते हैं। जबकि जो सामर्थ्यवान होते हैं, वह महंगी किताबें खरीद लेते हैं। शासन की यह जिम्मेदारी है कि वह प्रत्येक बच्चे को एनसीईआरटी की सस्ते दरों वाली पुस्तकों को उपलब्ध करवाए। लेकिन किसी का कोई ध्यान ही नहीं है। -नीरज शर्मा, प्रदेश महामंत्री उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ।
- माध्यमिक शिक्षा परिषद ने एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम निर्धारित कर रखा है। बच्चों तक किताबें उपलब्ध कराने के लिए प्रकाशक भी अधिकृत किए गए हैं। जिनकी जिम्मेदारी है कि वह बाजार में किताबों की उपलब्धता सुनिश्चित कराएं। अगर बाजार में किताबें नहीं हैं तो सोमवार को बाजार खुलने पर पड़ताल की जाएगी। जो भी तथ्य या जानकारी सामने आएगी। परिषद को पत्र लिखकर किताबें उपलब्ध कराने का अनुरोध किया जाएगा। -डॉ. धर्मेंद्र शर्मा, डीआईओएस।