अमुवि में रेडियो जॉकी नावेद की मिमिक्री का लुत्फ उठाती छात्राएं।
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दिल्ली का डॉन आरजे नावेद ने अपनी जानी पहचानी स्टाइल से एएमयू छात्र-छात्राओं का दिल जीत लिया। वहीं विद्यार्थियों ने भी उन्हें इतना प्यार-मोहब्बत दिया कि नावेद भावुक हो गए। मौका था एएमयू कल्चरल एजुकेशन सेंटर के लिटरेरी क्लब की ओर से आयोजित लिटरेरी फेस्टिवल का। तीन दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन दिल्ली से आरजे नावेद एएमयू पहुंचे और शानदार मिमिक्री से छात्रों को लोटपोट कर दिया।
इस दौरान उन्होंने अपने जीवन के सफर को भी रोचक अंदाज में छात्र-छात्राओं के साथ शेयर किया। कहा, वह बुलंदशहर के गांव बुगरासी के एक बेहद साधारण परिवार से हैं। जब दिल्ली गए तो सोचा नहीं था कि क्या करेंगे। कॉल सेंटर में काम मिला और हिदायत मिली कि किसी को फोन पर नाराज नहीं करना है।
टेलीफोन अटेंड करता था और कभी बूढ़ा, कभी जवान तो कभी लड़की की आवाज में लोगों से बात करता था। मिमिक्री वह बचपन से करते आए हैं। कहा, रात में लड़की की आवाज में लोगों से घंटों बात करते और कॉल सेंटर का प्लान बेचते थे। उन्होंने बताया कि वह आज जहां भी हैं अपनी आवाज एवं मिमिक्री की बदौलत हैं।
कहा, मैंने अपनी कला में गांव की विलुप्त होती भाषा (बोली) को हथियार बनाया और आगे बढ़ा। कॉल सेंटर का अनुभव उनके काम आया और रेडियो जॉकी बन गए। इससे पूर्व उन्होंने छात्रों से बातचीत में कहा कि मनोरंजन के साथ ही सोशल वर्क करने का प्रयास करते हैं। वह इस बात का खास ख्याल रखते हैं कि उनकी शरारतों से किसी को तकलीफ न पहुंचे और हंसने का पूरा मौका मिले।
उन्होंने बताया कि वह रेडियो जॉकी के 12 साल के सफर में अब तक 7872 शरारतें कर चुके हैं। छात्रों ने उनसे गुरमेहर कौर से संबंधित सवाल भी पूछे। उन्होंने मुर्गा बनाने वाले अंदाज में ‘पेपर बर्बाद मत करो, पेड़ बर्बाद होंगे’ का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान ‘गुप्ता जी सूजी है...’ के अतिरिक्त अपनी कई चर्चित मिमिक्री पेश कर छात्र-छात्राओं को गुदगुदाया। इस दौरान सीईसी के समन्वयक प्रो. एफए शीरानी, क्लब के सचिव वजाहत जिलानी, नवेद रहमान मौजूद थे।