नैनो तरल यूरिया अर्थात आधा लीटर की शीशी खेती-किसानी के लिए वरदान के समान है। यह एक बोरी यूरिया से कहीं ज्यादा प्रभावी ढंग से काम करती है। नैनो तरल यूरिया से सिर्फ उत्पादन ही नहीं बढ़ता है, बल्कि सस्ती होने के कारण फसल की गुणवत्ता भी अच्छी होती है। नैनो यूरिया उपज बढ़ाने का एक बेहतर साधन है। यह उपज की गुणवत्ता को भी बढ़ाती है।
यह महत्वपूर्ण जानकारी शनिवार को शहर के रामघाट रोड स्थित एक होटल में इफ्को की एक दिवसीय मंडलीय सहकारी संगोष्ठी में इफ्को के राज्य विपणन प्रबंधक अभिमन्यु राय ने व्यक्त की। उन्होंने कहा कि फसलों में नाइट्रोजन की कमी को पूरा करने के लिए किसान यूरिया का प्रयोग करते हैं। अभी तक यूरिया सफेद दाने के रूप में बोरी में उपलब्ध है, जिसके इस्तेमाल से आधे से कम हिस्सा पौधों को मिलता है।
दानेदार यूरिया का बहुत बड़ा भाग मिट्टी और हवा में चला जाता है। नैनो तरल यूरिया विभिन्न प्रकार की फसलों पर परीक्षण के बाद किसानों को उपलब्ध कराया गया है। आलू, धान, गेहूं, गन्ना विभिन्न प्रकार की सब्जियों, दलहन-तिलहन समेत सभी फसलों पर अच्छे परिणाम प्राप्त हुए हैं। आधा लीटर तरल यूरिया की शीशी पूरे एक एकड़ खेत के लिए पर्याप्त है। इसके प्रयोग से पर्यावरण, जल एवं मिट्टी का भी प्रदूषण नहीं होता है।
उन्होंने बताया कि नैनो तरल यूरिया का प्रयोग फसल की पत्तियों पर छिड़काव कर करते हैं। यह पत्तियों के माध्यम से पौधों में प्रवेश कर उत्पादन एवं उत्पादकता दोनों को बढ़ाने का काम करता है। दानेदार यूरिया के 10 बैग लाने- ले जाने के लिए वाहन की जरूरत पड़ती है, जबकि तरल यूरिया की 10 शीशियों को किसान मोटर साइकिल, स्कूटर या साइकिल पर थैले में आसानी से ले जा सकता है।
गोष्ठी में उप महाप्रबंधक विपणन लखनऊ जसवीर सिंह ने बताया कि इफ्को नैनो यूरिया का बिक्री मूल्य 240 रुपये से घटाकर अब 225 रुपये कर दिया गया है, जबकि एनपीकेएस की 50 किलो की बोरी को 1400 रुपये से घटाकर 1350 रुपये कर दिया है। क्षेत्रीय प्रबंधक बीके निगम ने जनपद के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि लक्ष्य के सापेक्ष 115 प्रतिशत आपूर्ति की गई है।
उपायुक्त उपनिबंधक अरविंद दुबे ने बताया कि किसानों को न सिर्फ अच्छे उर्वरक की आपूर्ति की जा रही है। गोष्टी में संयुक्त कृषि निदेशक राकेश बाबू, उप महाप्रबंधक आगरा एसके सिंह, उपनिदेशक भूमि संरक्षण हरेंद्र मिश्रा, उप कृषि निदेशक यशराज सिंह, डॉ. हसंराज सिंह, जिला कृषि अधिकारी अभिनंदन सिंह, आरके सिंह, भूमि संरक्षण अधिकारी दिव्या मौर्या, जिला कृषि रक्षा अधिकारी अमित कुमार, उमेश कुमार शर्मा ने भी अपने विचार रखे।