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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की मांग की सम्मान करेंगे प्रधानमंत्री

Mon, 18 Apr 2016 01:48 AM IST
अलीगढ़/ब्यूरो
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 फोरम फॉर मुस्लिम स्टडीज एंड एनालिसिस (एफएमएसए) ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शरीयत कानूनों पर बातचीत करने की घोषणा का स्वागत किया है। इसके साथ ही पाकिस्तान में बच्चों को नफरत का पाठ पढ़ाये जाने पर गहरी चिंता प्रकट की।
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फोरम के निदेशक डॉ. जसीम मोहम्मद ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड कार्यकारिणी की बैठक में विभिन्न इस्लामी एवं शरीयत मुद्दों पर गहन विचार विमर्श के अलावा बोर्ड संयोजक जफरयाब जिलानी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट करके शरीयत पर बातचीत की घोषणा का स्वागत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शरीयत हमारा धार्मिक मसला है। दूसरी ओर नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री है और हमारा धार्मिक कर्तव्य है कि देश की सरकार एवं कानून का सम्मान करें।
मीडिया सेंटर में आयोजित बैठक में उन्होंने कहा कि भारतीय मुसलमान एवं सरकार दोनों ही मुस्लिम लॉ बोर्ड का सम्मान करते हैं परंतु विगत कुछ वर्षों से बोर्ड का राजनीतिकरण हो रहा है जो कि उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि बोर्ड को भारतीय मुसलमानों को एक सकारात्मक दिशा दिखानी चाहिए ओर राजनीतिक लोगों को बोर्ड के मंच को इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।
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डॉ. जसीम मोहम्मद ने अंतरराष्ट्रीय धार्मिक आजादी पर अमेरीकी आयोग की 52 पेज की ताजा रिपोर्ट का चर्चा करते हुए कहा कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्कूलों में एक किताब के द्वारा बच्चों को जिहादी बनने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
स्कूलों में सहिष्णुता और धार्मिक सौहार्द की जगह अल्पसंख्यकों से नफरत की शिक्षा जा रही है जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की शिक्षा न केवल मानवीय मूल्यों एवं मानवता के खिलाफ  है बल्कि स्वयं पाकिस्तान के लिए हानिकारक है। डॉ. जसीम मोहम्मद ने मांग की कि संयुक्त राष्ट्र संघ और अन्य शांतिप्रिय देशों को अमेरीकी रिपोर्ट को संज्ञान में लेना चाहिए तथा पाकिस्तान के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगाना चाहिए। डॉ. फारूक खान, डॉ. शमसूर रहमान, डॉ. इलयास ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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