आज (21 जून) संगीत दिवस है। संगीत का नाम आते ही उन संगीत दिग्गजों की याद बरबस ही आ जाती है, जिन्होंने अपनी संगीत से अलीगढ़ व अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का नाम न केवल बॉलीवुड में बल्कि पूरी दुनिया में नाम चमकाया। इनमें संगीत सम्राट तानसेन के गुरु स्वामी हरिदास संगीत के सिरमौर माने जाते हैं, जिनका ताल्लुक खेरेश्वरधाम के हरिदासपुर से है। उन्हें भक्ति संगीत का पितामह भी कहा जाता है । स्वामी हरिदास के संगीत में ऐसा जादू था कि जो उनका संगीत सुनता था वह उन्हीं का होकर रह जाता था।
स्वामी हरिदास अपने हरि के आशीर्वाद से संगीत में पारंगत हुए।बाद में इनके कई शिष्य बने जो संगीत में अमर हो गए। पद्मश्री रविंद्र जैन, हिंदी फिल्मों के जाने-माने संगीतकार व गीतकार थे। उन्होंने कई फिल्मों में गीत भी लिखे और संगीत भी दिए। उन्हें बतौर संगीतकार वर्ष 1985 में फिल्म राम तेरी गंगा मैली के लिए फिल्म फेयर अवार्ड भी मिला। उनका भजो रे भैया राम गोविंद हरी, भजन काफी मशहूर है। रामायण धारावाहिक में मंगल भवन, अमंगलहारी भजन आज भी जादू बिखरे हुए है। पंडित सुरेश चंद शर्मा, पंडित किशन सिंह शास्त्रीय संगीत के गुरु थे। इसी तरह एएमयू के उस्ताद शफी, उस्ताद कमर मोहम्मद शास्त्रीय संगीत में उस्ताद थे। एएमयू के पूर्व छात्र तलत महमूद, उमा देवी जो बाद में फिल्मी दुनिया में टुनटुन नाम से जानी गईं, उन्होंने बॉलीवुड में संगीत में अपनी छाप छोड़ी। इसी इरादे से निकले उस्ताद वहीदुद्दीन डागर ने ध्रुपद धमार में कमाल किया। इनके बेटे डागर बंधु, ध्रुपद धमार में नाम कमाया। एएमयू से निकले डॉ. नूरुल हसन, कनान देवी, अजय झींगरन, डॉ. शमसुद्दीन शेख ने संगीत के क्षेत्र में झंडा गाड़ा। वहीं, कव्वाल हबीब पेंटर का कलाम बहुत कठिन है डगर पनघट, काफी मशहूर है। बॉलीवुड में मखमली आवाज से दिलों पर राज करने वाली पार्श्व गायिका अलका याज्ञनिक का भी रिश्ता अलीगढ़ से है। इन दिनों युवा पीढ़ी भी संगीत के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रही है।
फ्रांस में मनाते हैं संगीत का त्योहार
संगीत दिवस हर वर्ष 21 जून को 120 से अधिक देशों में मनाया जाता है, जिसमें फ्रांस भी शामिल है, जिसे संगीत दिवस मनाने के लिए मूल देश माना जाता है, जहां इसे शौकिया और पेशेवर संगीतकारों दोनों को सम्मानित करने के लिए संगीत का त्योहार के रूप में जाना जाता है।
संगीत को रोजी-रोटी से जोड़ने की जरूरत: फॉस्टर
संगीतकार व गीतकार जॉनी फॉस्टर का कहना है कि भारतीय संगीत को ईमानदारी से रोजी-रोटी से जोड़ने की जरूरत है। संगीत की तरफ गंभीर होकर चिंतन-मनन करना होगा। सरकारी स्तर पर भी और आम जनमानस को भी सोचना होगा। हर स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी में संगीत को सिखाने पढ़ाने का पाठ्यक्रम बनाना होगा। रोजी-रोटी से संगीत जुड़ेगा तो सब लोग अन्य विषयों की तरह से इसको भी कैरियर का हिस्सा बना पाएंगे।