फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अलीगढ़: कैनेडी हॉल की जगह हैबिटेट सेंटर में सजी मुशायरे की महफिल, श्रोताओं ने कहा वाह, वाह...

Sun, 24 Sep 2023 03:03 AM IST
चमन शर्मा इकराम वारिस, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

यह मुशायरा कैनेडी हॉल में होना था, पर इसकी जगह बदल कर कल्याण सिंह हैबिटेट सेंटर कर दी गई।
विज्ञापन
हैबिटेट सेंटर में मुशायरा आयोजन - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अलीगढ़ में वर्टेक्स इंवेट दुबई के बैनर तले कल्याण सिंह हैबिटेट सेंटर में मुशायरे का आयोजन किया गया। कैनेडी हॉल से मुशायरा स्थल बदलने के बाद भी श्रोताओं की काफी भीड़ रही।

विज्ञापन


  • अजहर इनायती ने सुनाया- ये और बात कि आंधी हमारे बस में नहीं, मगर चराग जलाना तो इख्तियार में है। 
  • इकबाल अशहर ने पढ़ा- ठहरी-ठहरी सी तबीयत में रवानी आई, प्यास दरिया की निगाहों से छुपा रखी है। 
  • शकील आजमी ने सुनाया- भूख में इश्क की तहजीब भी मर जाती है, चांद आकाश पे थाली की तरह लगता है। 
  • महशर अफरीदी ने सुनाया- जगह की कैद नहीं थी कोई कहीं बैठे, जहां मकाम हमारा था हम वहीं बैठें। 
  • अज्म शाकिरी ने सुनाया- आंसुओं से लिख रहे हैं बेबसी की दास्तां, मैंने इक शहर हमेशा के लिए छोड़ दिया। 
  • एएम तुराज ने पढ़ा- ठहरे हुए एहसास का मंजर नहीं आया मुद्दत से सफर में हूं मगर घर नहीं आया। 
  • खुशबू शर्मा ने सुनाया-इतने उलझे हुए सपने भी नहीं देखती मैं। 
  • पपलू लखनवी ने सुनाया- ये इश्क-विश्क का किस्सा तमाम हो जाए, सफेद दाढ़ी हवस की गुलाम हो जाए। 
  • अखिलेश मिश्रा ने सुनाया- रोटी खरीद लाया है इमान बेच कर, घर में बचा था बस यही सामान बेचकर। 

विज्ञापन

अजहर इकबाल, नदीम फारूक, डॉ. पूनम गजल ने कलाम व कविता सुनाई। इस अवसर पर वर्टेक्स इंवेट दुबई के पुश्किन आगा, आगा यूनुस आदि मौजूद रहे।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें