नगर निगम में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते उत्तर प्रदेश स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के कर्मचारी।
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काम बंद हड़ताल होने और न होने को लेकर गुरुवार को नगर निगम के सेवा भवन में दो कर्मचारी गुट आमने सामने आ गए। एक गुट का कहना था कि हमारी सभी मांगें मान ली गई हैं इसलिए हड़ताल का कोई औचित्य नहीं है। जबकि दूसरे गुट का कहना था कि कोई मांग अभी नहीं मानी गई है। इसलिए दो दिवसीय कार्यबंदी हड़ताल का पहला दिन सफल रहा है। इस स्थिति के चलते नगर निगम में आने वाले आम लोगों के काम प्रभावित हुए। उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो सका।
नगर निगम में कर्मचारियों के दो संगठन हैं। नगर निगम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष गोपाल बाबू शर्मा हैं। इनके नेतृत्व में दो दिवसीय कार्यबंदी हड़ताल का आयोजन किया गया। गोपाल बाबू शर्मा ने बताया कि हमारी मांग है कि छठे वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर किया जाए। जिससे हमें सातवें वेतन आयोग का लाभ मिल सके। इसके अलावा कर्मचारियों के प्रमोशन में भी अनियमितताएं दूर की जाएं। इसके अलावा निगम के सेवानिवृत्त कर्मियों को भी राज्य कर्मियों की तरह लाभ दिया जाए।
सबसे अहम बात कि संविदा पर सफाई कर्मचारियों को 250 रुपये प्रतिदिन दिए जाते हैं। जबकि संविदा के सामान्य कर्मचारियों को 200 रुपये दिए जाते हैं। इनको भी 250 रुपये दिए जाएं। इसको लेकर हड़ताल जारी रही। दूसरी ओर नगर निगम कर्मचारी कल्याण संघ के अध्यक्ष राधेश्याम ने बताया कि दो दिन पहले नगर आयुक्त से वार्ता हुई थी जिसमें सभी मांगों पर सहमति बन गई थी। इसके बाद हड़ताल वापस ले ली गई। अब कोई हड़ताल नहीं है। काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि जो लोग कथित हड़ताल की बात कर रहे हैं उनका संगठन अवैध है। उन्होंने चुनाव में भी हिस्सा नहीं लिया था। इस पूरी कवायद में वह लोग जो अपने किसी काम के लिए नगर निगम आए थे, वह परेशान होते रहे।