वातावरण में लगातार बढ़ रहे स्मॉग, माइक्रोफाइन डस्ट और इसके कारण लोगों को हो रही श्वसन संबंधी समस्याओं पर पर्यावरणविदें ने चिंता जतायी है। दिल्ली में क्रिकेट मैच में स्मॉग का मुद्दा उठने के बाद अलीगढ़ में इसके असर पर चर्चा शुरू हुई है।
इसी बात को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने इस बार कुछ निर्धारित स्थानों पर लकड़ी के स्थान पर गैस या बिजली चलित अलाव जलवाने की व्यवस्था पर विचार करना शुरू किया है, जिससे प्रदूषण कुछ कम हो सके।
नगर निगम प्रत्येक वर्ष सर्दियों में फुटपाथ पर रहने वालों, या खुले में रात गुजारने वालों के लिए अलाव की व्यवस्था करवाता है। अब तक देखने में आता था कि नगर निगम के ट्रैक्टर निर्धारित स्थानों पर अलाव के लिए लकड़ियां रखवा दी जाती थीं।
अब पिछले कुछ महीनों में धुएं और स्मॉग की समस्या आ गई है। लकड़ियां जलाने और धुएं जैसी सामग्री जलाने पर पर्यावरणविदें ने भी चिंता जतायी है। इसके अलावा दिल्ली में जो स्मॉग की समस्या है उसको लेकर चिंताजनक स्थिति अलीगढ़ की भी बनी हुई है। इन्हीं सभी बातों को ध्यान में रखते हुए नगर निगम अब लकड़ी के अलाव के अलावा अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है।
कंबल वितरण की मांग
मकदूम नगर निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट नदीम अल्वी ने नगर आयुक्त को पत्र भेजकर गरीब बस्तियों में गर्भवती, वृद्ध और मजबूर महिलाओं को सर्दियों की मार से बचाने के लिए 100 कंबल वितरण करने के लिए मांग की है।
प्लास्टिक और टायर जलाना बेहद खतरनाक
कुछ लोग अलाव के रूप में प्लास्टिक की पन्नी या टायर आदि को जलाते हैं जो कि बेहद खतरनाक है। मलखान सिंह जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. रामकिशन कहते हैं कि प्लास्टिक या टायर आदि के जलाने से कुछ ऐसी खतरनाक केमिकलयुक्त गैसें निकलती हैं जो कि बच्चों के मौलिक विकास को हमेशा के लिए रोक देती हैं। यही कारण है कि निम्न बस्तियों, खराब रहने वाले इलाकों में बच्चों को कुपोषित स्थिति में देखा जा सकता है।