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मेयर सहित सदन ने निभाया फर्ज, अब शासन उतारे ‘कर्ज’

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नगर निगम के अधिवेशन का विरोध करते संयुक्त व्यापार मंडल के पदाधिकारी। - फोटो : CITY OFFICE
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अभिषेक शर्मा
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एरियर सहित जिस गृहकर पर शहर भर में हायतौबा मची हुई थी और जगह-जगह से विरोध के स्वर उठ रहे थे। निकाय चुनाव से ऐन पहले उसके एरियर पर रोक लगाकर मेयर सहित पूरे सदन ने हर शहरी के हित में बृहस्पतिवार को अपना फर्ज निभाया है। एक अनुमान के अनुसार करीब 70 करोड़ के एरियर माफी का बड़ा वित्तीय मसला है। इसलिए इस पर अंतिम मुहर शासन की लगनी होगी। इस प्रस्ताव को अनुमोदन के लिए शासन को भेजा जाएगा। इसके बाद ही इसे मान्य माना जाएगा। महापौर व नगर आयुक्त ने साफ कर दिया है कि सदन में पारित प्रस्ताव के अनुसार एरियर वसूली पर रोक रहेगी। शासन के अनुमोदन पर आगे प्रक्रिया तय होगी।
इस तरह शुरू हुआ सियासी विरोध
नगर निगम द्वारा शासनादेश के अनुरूप जीआईएस सर्वे कराकर वित्तीय वर्ष की शुरुआत से गृहकर वृद्धि के साथ बिल भेजना शुरू किया गया, शासनादेश के अनुसार वर्ष 2017 से 2022 तक का एरियर भी लगाया जा रहा था। इस वृद्धि का के बाद गृहकर बिल घरों पर पहुंचने के बाद विरोध के स्वर उठना शुरू हुए थे। सबसे पहले बसपा से निर्वाचित मेयर मो.फुरकान ने इसका विरोध किया। उनके पास शिकायत लेकर पहुंचे लोगों से हर हाल में हल निकालने का वायदा किया। हालांकि मेयर की दलील थी कि पिछली बोर्ड बैठक में तय मसौदे के अनुसार अधिकारियों ने मनमाने तरीके से यह वृद्धि की है। इधर, इसका लगातार विरोध बढ़ते देख बसपा के मेयर के बाद सपा ने और फिर भाजपा के जनप्रतिनिधियों व पार्षद, इसके बाद कांग्रेस भी विरोध में उतर आई। अंत में व्यापारियों ने इसके खिलाफ संयुक्त समिति का गठन कर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया। इस सबके बीच पहले से विशेष अधिवेशन बुलाने की तैयारी कर रहे मेयर ने नगर निगम अधिकारियों से लेकर सभी दलों के पार्षदों से अलग-अलग बैठकें कीं। चूंकि आने वाला समय निकाय चुनाव का है, इसलिए भाजपा ने भी इस मुद्दे पर रणनीति बनाई और तय हुआ कि विशेष अधिवेशन बुलाकर इसका हल निकाला जाए।
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दो दिन पहले तय था पूरा प्लान
बेशक मेयर सत्ताविरोधी दल से जुड़े हैं। मगर उन्होंने इस मसले पर सभी से राय ली। उधर भाजपा पार्षद दल के 46 पार्षदों ने प्रस्ताव तैयार किया। सभी की नगर आयुक्त से मंत्रणा हो गई और दो दिन पहले यह तय हो गया कि सदन में क्या होना है। उसी प्लानिंग के तहत कृष्णांजलि में विशेष अधिवेशन जानबूझकर बुलाया गया। यह भी तय किया गया कि अंदर किसी गैर जरूरी व्यक्ति को नहीं आने दिया जाएगा। सिर्फ पार्षद, मेयर व संबंधित अधिकारी सदन में आएंगे। इसके लिए फोर्स भी लगाई गई। 77 में से भाजपा के 46 पार्षदों ने तीन विषयों पर अपना प्रस्ताव दिया। विपक्षी दलों के 35 पार्षदों को मेयर की ओर से इशारा था।
नगर आयुक्त ने पढ़ा प्रस्ताव, बस सपा पार्षद ने टोका
राष्ट्रगीत के बाद सदन की कार्यवाही शुरू करते हुए सदन के वित्तीय सचिव मुख्य कर निर्धारण अधिकारी विनय कुमार राय प्रस्ताव पढ़ने लगे। इस पर नगर आयुक्त गौरांग राठी ने खुद उनके हाथ से प्रस्ताव लेकर पढ़ना शुरू कर दिया। पहले प्रस्ताव एरियर समाप्त पर उन्होंने स्थगित करने की बात कही। इस पर सभी पार्षद एक स्वर में सहमति देने लगे। मगर सपा पार्षद मुशर्रफ महजर ने कहा कि स्थगित नहीं वापसी/निरस्त पढ़िए साहब। तब उसे निरस्त पढ़ा गया। इसके बाद दो अन्य प्रस्तावों पर भी सभी ने ध्वनित मत से सहमति दी और मेयर ने भी इस प्रस्ताव के तीनों बिंदुओं पर सहमति दे दी।
दूसरी बार मेयर ने बुलाया कृष्णांजलि में विशेष अधिवेशन
यह पहला मौका नहीं, जब मेयर ने सीधे जनता से जुड़े मुद्दे पर विशेष अधिवेशन बुलाया हो। इससे पहले करीब दो वर्ष पूर्व नगर निगम के यूजर चार्ज को लेकर इसी तरह विरोध हुआ था। उस विरोध का भी मेयर ने सामना किया, जिसमें डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने पर यूजर चार्ज वसूली तय हुई थी। मगर मेयर ने विरोध को ध्यान में रखते हुए विशेष अधिवेशन इसी तरह कृष्णांजलि में बुलाया और ध्वनिमत से उस पर रोक का प्रस्ताव भी इसी तरह चंद मिनट में पास कराया था। इस तरह पांच वर्ष के कार्यकाल में यह दूसरा मौका है, जब कृष्णांजलि में मेयर ने विशेष अधिवेशन बुलाकर जनता से जुड़े मुद्दों पर फैसला लेने का काम किया है।
ये रहे मौजूद
मेयर, नगर आयुक्त, अपर नगर आयुक्त के अलावा आदि के अलावा बोर्ड बैठक में भाजपा से पार्षद दल के नेता वीरेंद्र सिंह, उपसभापति डॉ.मुकेश शर्मा, कुलदीप पांडेय, पुष्पेंद्र सिंह जादौन, सुरेंद्र पचौरी, विजय तोमर, दीपू शर्मा, राजेंद्र चौहान, हेमंत गुप्ता, रीता राजपूत, संजय पंडित, अलका गुप्ता, नरेंद्र वार्ष्णेय, आशु उपाध्याय, हरिओम अग्रवाल, संतोष, देव कुमार, विमलेश, लतेश चौधरी, अनिल सेंगर, नरेंद्र प्रताप, भूपेंद्र सिंह, सपा पार्षद मुशर्रफ हुसैन, हफीज अब्बासी, संजय शर्मा, रुखसार अकरम, नदीम खान, हुमैरा अफजाल, शाकिर मलिक, नईम अख्तर, मो.शाकिर, इमरान खान, वीरेंद्र सिंह, हुस्न बानो, सायरा बानो आदि मौजूद रहे।
- सभी पार्षदों संग अलग अलग बैठकों के बाद इन तीन प्रस्तावों को सदन में लाया गया। इन तीनों प्रस्तावों को जनता के हित में पारित किया गया है। यह तीनों रियायतों को पूरे नगर निगम ने मिलकर लागू किया है। इसमें एरियर निरस्त किया गया है। बाकी 20 फीसदी की छूट व बिल संशोधन प्रस्ताव पारित हुआ है। - मो.फुरकान, मेयर
- इन दिनों कोविड के बाद से जनता व व्यापारी वर्ग परेशान है। इसी को ध्यान में रखते हुए बोर्ड में एरियर पर रोक, बिल संशोधन, इस वर्ष में अप्रत्याशित 20 फीसदी छूट के प्रस्ताव पारित किए गए हैं। लोगों को इससे राहत मिलेगी। किसी को अब बढ़ा कर देने की जरूरत नहीं है। जिन्हें अपने बिल गलत लग रहे हैं, वे संशोधित करा लें और छूट का लाभ लें। हो सकता है कि सर्वे में कुछ गलतियां हुई हों। उसे आपत्ति दर्ज कराकर सही कराया जा सकता है। - गौरांग राठी, नगर आयुक्त
पार्षद बोले
- यह जनता की मांग थी। हमारे स्तर से तीन बिंदुओं पर प्रस्ताव लाया गया। जिसे सदन में ध्वनि मत से सभी पार्षदों व सभी दलों ने सहमति दी है। मगर हमारी अभी एक मांग और है कि पिछले 18 माह से बोर्ड का सामान्य अधिवेशन नहीं हुआ है। उसे भी लाया जाए, ताकि जनता से जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा हो सके। - डॉ.मुकेश शर्मा, उपसभापति भाजपा पार्षद
- जनता के हित को ध्यान में रखते हुए यह प्रस्ताव लाए गए थे। जिस पर सभी दलों के पार्षदों ने सहमति दी है। यह जनता के हित में हुआ निर्णय है। अब सदन के प्रस्ताव को शासन से अनुमोदित कराने का काम नगर निगम अधिकारियों व भाजपा नेताओं का है। उसे भी कराया जाए।-मुर्शरफ महजर, सपा पार्षद
ये है स्थिति --
- पुराने शहर के 1.76 लाख परिवारों को जारी हुए गृहकर के बिल
- सीमा वृद्धि वाले नए इलाकों में करीब 75 हजार परिवार शामिल
- सीमा वृद्धि वाले नए इलाकों में अभी पूरी तरह एरियर लागू नहीं
अब गेंद लखनऊ के पाले, भाजपा
जनप्रतिनिधियों को निभाना होगा जिम्मा
अलीगढ़। इस गृहकर वृद्धि के विरोध में पिछले माह प्रेसवार्ता कर विरोध दर्ज कराने वाले जिले के भाजपा जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। हालांकि सदन ने प्रस्ताव पारित कर दिया। मगर उसे अनुमोदित लखनऊ से कराना होगा। इसके लिए उन्हें पैरोकारी करनी होगी। इस विषय पर भाजपा के पार्षद व उपसभापति डॉ.मुकेश शर्मा कहते हैं कि संगठन में उनकी बातचीत हो गई है। जैसे ही नगर निगम सदन का प्रस्ताव मेयर के हाथ से नगर निगम पहुंचेगा। उसके बाद उसे नगर आयुक्त स्तर से शासन को भेजा जाएगा। उस पर अनुमोदन जनप्रतिनिधि मिलकर कराएंगे। इस विषय में नगर आयुक्त गौरांग राठी स्वीकारते हैं कि एरियर पर रोक संबंधी बिंदु बड़ा वित्तीय मामला है। इसलिए उसे अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। मगर हमारे पास इतना अधिकार है कि सदन के फैसले के अनुसार हम उसकी वसूली तत्काल रोक रहे हैं। बाकी शासन का जो निर्देश होगा, उस पर तय होगा। ब्यूरो
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क्रेडिट की लड़ाई, बंटी मिठाई, व्यापारियों ने जीत बताई
अलीगढ़। गृहकर एरियर पर रोक व 20 फीसदी छूट को लेकर अब क्रेडिट की लड़ाई शुरू हो गई है। एक तरफ जहां इसे व्यापारी अपने आंदोलन की जीत बता रहे हैं। वहीं भाजपा पार्षद दल खुद की जीत बता रहा है। इसी क्रम में दोपहर को बोर्ड बैठक जारी रहने तक नगर निगम विरोधी नारेबाजी कर रहे व्यापारी नेताओं ने खबर बाहर आने के बाद एक दूसरे को जीत की बधाई दी। वहीं, पार्षदों ने एक दूसरे को बधाई दी और मिठाई बंटी। इस विषय पर भाजपा पार्षद पुष्पेंद्र सिंह जादौन कहते हैं कि भाजपा पार्षदों के विरोध व एकजुटता के प्रस्ताव से यह जीत मिली है। वहीं भाजपा महानगर अध्यक्ष विवेक सारस्वत की अगुवाई में इसे अपनी जीत बताया। कहा कि इसे लेकर लगातार पार्षद विरोध कर रहे थे। व्यापारी नेता मनीष बूल, हरिकिशन अग्रवाल, संजीव अग्रवाल आदि ने सदन व भाजपा नेताओं का आभार जताया है। इधर, भूपेंद्र वार्ष्णेय, मानव महाजन, सुरेश चंद्र पेठे वाले आदि ने सदन का आभार जताया है। वहीं इसे अपनी जीत बताया है। व्यापारी नेता सतीश माहेश्वरी, ओमप्रकाश मास्टर, सौरभ सिक्ससंस आदि ने भी इसे अपनी जीत बताते हुए सदन का आभार जताया है। ब्यूरो

नुमाइश कृष्णांजलि में नगर निगम के अधिवेशन में राष्ट्रगान में उपस्थित पार्षद। - फोटो : CITY OFFICE

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