आखिरकार निकाय चुनाव के आरक्षण को लेकर चुनाव लड़ने वाले दावेदारों का इंतजार बृहस्पतिवार को खत्म हो गया। आरक्षण घोषित होने के बाद कई दावेदारों का चुनाव लड़ने का ही सपना ध्वस्त हो गया है। बड़े अरमान लेकर वे काफी समय से चुनाव की तैयारियों में जुटे हुए थे। वार्ड का गणित गड़बड़ा जाने से अब उन्होंने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अपने पक्ष के समर्थकों को चुनाव लड़ाने का फार्मूला तैयार कर लिया है।
वार्डवार आरक्षण को लेकर दावेदारों की काफी समय से शासन की घोषणा पर निगाहें लगी हुई थीं। जिला प्रशासन ने आठ नवंबर को नगर निगम समेत सभी 19 निकायों में प्रस्तावित आरक्षण को तय कर उसे शासन की मंजूरी को भेजा था। हालांकि पहले तय आरक्षण को चार नवंबर को शासन को भेजना था, लेकिन महिला सीट को लेकर आरक्षण का पेच फंसा रहा।
शासन की प्राथमिकता महिला सीट को लेकर है। ऐसे में महिला सीट बढ़ाने पर फिर से माथापच्ची शुरू हुई और सभी निकायों में आरक्षण तैयार कर उसे आठ नंबवर को भेजा गया था। हालांकि वार्ड वार आरक्षण घोषित हो जाने के बाद अब सबकी निगाहें मेयर, नगर पालिका एवं नगर पंचायत अध्यक्ष के पद के आरक्षण पर टिक गई हैं। जिले में कुल 19 नगरीय निकाय के कुल 342 वार्ड हैं।
सबसे अधिक 90 वार्ड नगर निगम क्षेत्र में हैं। नगर पालिका परिषद अतरौली एवं खैर में 25- 25 वार्ड हैं। नगर पंचायत छर्रा में 15, बेसवां में 10, इगलास में 15, जट्टारी में 13, कौड़ियागंज में 11, जलाली में 13, पिलखना में 10, विजयगढ़ में 10, हरदुआगंज में 11, चंडौस में 11, पिसावा में 12, गभाना में 15, मडराक में 15, बरौली में 14, टप्पल में 13 एवं जवां- सिकंदरपुर में 14 वार्ड निर्धारित किए गए हैं।
जबकि 1081 मतदेय स्थल बनाए गए हैं। शासन स्तर से जिला स्तर पर नगर निकायों के वार्ड का आरक्षण तय करने के निर्देश दिए थे। शासन ने प्रस्तावित आरक्षण में मिली छोटी-मोटी खामियों को दूर करने के बाद इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगाते हुए इसकी सूची को सार्वजनिक कर दिया।
आरक्षण तय करने का यह है नियम
शासन से जारी आदेश के अनुसार पुराने वार्डों का आरक्षण चक्रानुक्रम व्यवस्था के आधार पर ही किया गया है। इसमें पहले अनुसूचित जनजाति (एसटी), अनुसूचित जाति (एससी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की महिलाओं के लिए वार्ड आरक्षित किए गए हैं। इसके बाद इसी वर्ग के पुरुषों के लिए श्रेणीवार वार्ड आरक्षित किए गए हैं। बाकी के वार्डों को अनारक्षित(सामान्य) रखा गया है। नए वार्ड का आरक्षण वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर किया गया है।
मतदाता सूची में नाम बढ़वाने का अब भी है मौका
यदि निकाय चुनाव की मतदाता सूची में किसी भी दावेदार या मतदाता का नाम अब तक नहीं बढ़ सका है तो चुनाव आयोग ने ऐसे लोगों को एक बार फिर से मौका उपलब्ध कराया है। निर्वाचन में नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने तक वह आवेदन कर मतदाता सूची में अपना नाम बढ़वा सकते हैं।
अपना आवेदन उन्हें संबंधित निकाय के प्रशासक एवं एसडीएम के समक्ष देना होगा। जांच के उपरांत वैद्य पाए जाने पर ऐसे मतदाताओं के नाम सूची में बढ़ाए जाएंगे। चुनाव आयोग की ओर से इस बारे में आदेश जारी कर दिया गया है।