नील गाय और सांड़ के हमले से मौत होने को भी प्रदेश सरकार ने राज्य आपदा मान लिया है। आपदा कार्यालय कलेक्ट्रेट के साथ ही तहसील में आवेदन करने पर आपदा विभाग पीड़ित परिजनों को जांच के बाद चार लाख रुपये की आर्थिक मदद करेगा। शासन स्तर से इसको लेकर अधिसूचना जारी कर दी गई है।
प्रदेश के राजस्व अनुभाग-11 के प्रमुख सचिव सुधीर गर्ग की तरफ से 13 अक्तूबर को अधिसूचना जारी हुई है। अधिसूचना के माध्यम से वनरोज (नीलगाय) और सांड़ से हमले से मृत्यु होने को आपदा माना गया है। अब इस तरह की घटनाओं में मृत्यु होने वाले व्यक्ति के परिजनों को सरकार आपदा राहत के रूप में चार लाख रुपये देगी। जिले में सांड़ और नील गाय के हमले में मरने वालों की संख्या कहीं अधिक है।
सरकार की अधिसूचित आपदाएं
बेमौसम भारी वर्षा और अतिवृष्टि, बिजली गिरने, आंधी-तूफान, लू-प्रकोप, नाव दुघर्टना, सर्पदंश, सीवर सफाई, गैस रिसाव, बोरवेल में गिरना, मानव वन्य जीव द्वंद (जंगली जानवरों का हमला) पानी में डूबकर मृत्यु होने को अधिसूचित आपदाएं मानकर सरकार पीड़ितों की आर्थिक मदद करती है। अक्तूबर से इस सूची में नीलगाय और सांड़ के हमले से होने वाली मृत्यु को भी आपदा में शामिल कर लिया गया है।
हमले में मौत होने की दशा में शव का पोस्टमार्टम कराना अनिवार्य है। आश्रितों को अपना आवेदन तहसील या आपदा कार्यालय से करना होगा। इसके बाद लेखपाल, कानूनगो की जांच रिपोर्ट और तहसीलदार की संस्तुति के बाद आर्थिक सहायता धनराशि के रूप में चार लाख रुपये आपदा कोष से प्रदान किए जाएंगे।
प्रदेश सरकार ने अब सांड़ और नील गाय के हमले में मरने वाले किसानों एवं अन्य लोगों के आश्रितों को आपदा मानते हुए चार लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान करने का निर्णय लिया है। इसके लिए पोस्टमार्टम के बाद आवेदन करना होगा। जांच एवं सत्यापन के बाद पीड़ित परिवार को सरकारी मदद दिलाई जाएगी।
- अमित कुमार भट्ट, एडीएम वित्त एवं राजस्व