अपने कार्यकाल को याद करते हुए कहती हैं कि गूलर रोड पोखरों के स्वरूप की वापसी पर भी बहुत काम किया। किसी पर भी बिना टिप्पणी किए बोलीं कि उस पर मुझे अपने कदम वापस खींचने पड़े। आज भी उसकी पूरी पत्रावली उनके पास रखी है।
अब सहयोग नहीं सामान्य रूप से चल रहा निगम
सावित्री वार्ष्णेय कहती हैं कि अब नगर निगम सामान्य रूप से चल रहा है। सहयोगात्मक रूप से नहीं चल रहा है। यह साफ परिलक्षित होता है।
उपलब्धि
सेवा भवन व समर्पण कांप्लेक्स का शुभारंभ बड़ी उपलब्धि
पांच सुझाव
- गीली सिल्ट सड़क पर न डालकर मशीन से सीधे उठकर शहर के बाहर जाए
- जनसंख्या और क्षेत्रफल बढ़ने के अनुसार सभी संवर्ग में स्टाफ बढ़ाया जाए
- हैदराबाद की तर्ज पर रात में 12 बजे से 4 बजे तक शहर की सफाई की जाए
- जलभराव से निजात को शहर की विलुप्त पोखरों का स्वरूप वापस किया जाए
- मेयर को बिना किसी भेदभाव व दल के पार्षदों के समान काम करने चाहिए
राजनीतिक परिचय
सावित्री वार्ष्णेय का मायका मुंबई है। उनकी शादी अतरौली के संघ व भाजपा से जुड़े परिवार के इंजीनियर स्व.राघवेंद्र वार्ष्णेय से हुई। 1994 में परिवार के साथ वह मैरिस रोड पर आकर बस गईं। सामाजिक रूप से सक्रिय सावित्री वार्ष्णेय समाज, भारत विकास परिषद, महिला संगठनों व भाजपा से जुड़कर काम करने लगीं। उनके पति श्री वार्ष्णेय महाविद्यालय की प्रबंध समिति में शीर्ष पदों पर रहे। पति के देहांत के बाद उनके बेटे अमेरिका जाकर बस गए। इसलिए उनका अब ज्यादातर समय विदेश में बेटे के पास ही बीतता है।