महानगर के मसूदाबाद चौराहे पर 25 साल पहले हुई कुख्यात अपराधी तुफैल अहमद की हत्या में मंगलवार को मुजाहिद हसन खां गुड्डू ने कोर्ट में आत्म समर्पण कर दिया। हाईकोर्ट के निर्देश पर चार माह पूर्व जारी गैर जमानती वारंट में गुड्डू के छोटे भाई खालिद हसन खां पप्पू को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
गुड्डू तभी से फरार था। अब न्यायालय ने चार माह की फरारी के बाद कुर्की नोटिस जारी कर दिया, जिसके चलते कोर्ट में उसने आत्म समर्पण कर दिया, जहां से जेल भेज दिया गया। बता दें कि दोनों भाई सिविल लाइंस थाने के हिस्ट्रीशीटर हैं।
हाईकोर्ट के निर्देश पर मई में गैर जमानती वारंट जारी होने पर पुलिस ने पप्पू को गिरफ्तार किया था। इस मामले में तीन अक्तूबर को सीजेएम न्यायालय ने गुड्डू के खिलाफ कुर्की नोटिस जारी कर दिए। कुर्की से पहले गुड्डू ने आत्म समर्पण किया है।
हालांकि, खास बात यह है कि इस मुकदमे में पप्पू की अर्जी पर हाईकोर्ट से स्टे था। गुड्डू को लेकर नहीं हुआ था। इंस्पेक्टर सिविल लाइंस प्रवेश राणा ने गुड्डू के आत्म समर्पण करने और न्यायालय द्वारा उसे जेल भेजे जाने की पुष्टि की है। दोनों भाई उनके थाने से हिस्ट्रीशीटर भी घोषित हैं।
बता दें कि 21 मई 1997 की सुबह करीब दस बजे बन्नादेवी क्षेत्र के सराय रहमान निवासी 26 वर्षीय कुख्यात अपराधी तुफैल अहमद अपने साथी संग बाइक से कहीं जा रहा था। तभी कार सवार बदमाशों ने मसूदाबाद के पास फायरिंग कर उसकी हत्या कर दी।
रंजिश व गैंगवार में हुई इस हत्या में सिविल लाइंस के हिस्ट्रीशीटर व मूल रूप से परौरा बरला हाल बरगद हाउस निवासी मुजाहिद हसन गुड्डू, खालिद हसन उर्फ पप्पू, जौहराबाग के अहमद व खालिद के अलावा नई बस्ती के तोतला उर्फ गुड्डू को नामजद किया गया।
घटना के बाद आरोपी पक्ष की गिरफ्तारी न होने और विवेचना सही न होने का आरोप लगाकर तुफैल के भाई चमन खां विवेचना को सीबीसीआईडी ले गए, जहां से दो वर्ष बाद इन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दी गई। इस चार्जशीट पर आरोपी पक्ष हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे ले आया, तब से मसला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ था।
बमुश्किल मिली पत्रावली, तब हुए वारंट
तुफैल पक्ष के अनुसार कि कुछ साल पहले हाईकोर्ट से स्टे हट गया था। खबर पर जब पैरोकारी शुरू की तो अदालत से पत्रावली गायब थी। वे फिर हाईकोर्ट गए। हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीसीआईडी ने फिर से पत्रावली खोजकर दी। तब जाकर अदालत ने सभी आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करते हुए 26 मई गिरफ्तार कर पेश करने की तारीख नियत की है।
तुफैल के भाई इकबाल की भी हुई थी हत्या
इस हत्याकांड से पहले से इन दोनों गुटों में रंजिश चल रही थी। इसी रंजिश में पहले तुफैल के भाई इकबाल की सिविल लाइंस में हत्या हुई थी। इसका आरोप गुड्डू-पप्पू पर लगा था। इसके बाद गुड्डू-पप्पू के चाचा एएमयू के प्रो. इकबाल बरूला की हत्या हुई, जिसका आरोप तुफैल पर लगा। इसी बदले और रंजिश में तुफैल की हत्या हुई थी।
विधानसभा चुनाव लड़ चुका है गुड्डू
दोनों भाई अपराध जगत से प्रॉपर्टी कारोबार व सियासत में पहुंचे। गुड्डू ने एक मर्तबा बसपा से और एक मर्तबा पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह द्वारा बनाई गई राक्रांपा से छर्रा सीट पर चुनाव लड़ा। मगर वह दोनों चुनाव हार गया। पिछले काफी समय से दोनों भाई सपा में सक्रिय थे और अक्सर सपा नेताओं संग व सपा के कार्यक्रमों में देखे जाते थे।