ओजोन सिटी के चेयरमैन प्रवीन मंगला के आरोपों को लेकर सांसद सतीश गौतम का कहना है कि वह इस सड़क में रोड़ा नहीं बने, बल्कि उनका पहले दिन से कहना है कि इस सड़क निर्माण से जुड़े सात करोड़ के घोटाले की जांच हो। सांसद कहते हैं कि उनकी मंशा हमेशा विकास की रही है। रहा सवाल रिश्तेदार मनोज गौतम का तो सांसद होने के नाते उनके लिए रिश्तेदार व जनता बराबर है।
सांसद कहते हैं कि यह सड़क सपा शासन काल में एडीए से मंजूर हुई और 2017-18 में सात करोड़ की लागत से बनी। छह किमी की इस सड़क को ठेकेदारों ने निर्माण किया। पहली बारिश यानि छह माह में ही सड़क टूट गई। यह चिंता का विषय है। आखिर सड़क क्यों टूटी ? उसमें क्या कमिया थीं ? टूटने के मुख्य कारण क्या थे ? कौन लोग इसके लिए जिम्मेदार थे ? सड़क फिर से बने ये प्रयास भाजपा विधायकों द्वारा किए गए हैं। सड़क निर्माण के लिए फिर से शासन स्तर पर वित्तीय स्वीकृति मिलने जा रही है। सिंचाई विभाग ने पीडब्ल्यूडी को सड़क निर्माण की एनओसी भी दे दी है।
सांसद ने कहा है कि वह पहले दिन से कहते आ रहे हैं कि उस सात करोड़ के घोटाले की जांच हो। रहा सवाल प्रवीन मंगला के उन आरोपों का जिनमें वे खुद को व अन्य लोगों को परेशान करने की बात कह रहे हैं तो वह प्रवीन मंगला को जानते तक नहीं। पिछले नौ वर्ष के संसदीय कार्यकाल में आज तक उनकी फोन पर या आमने सामने कभी वार्ता तक नहीं हुई। न कभी किसी आयोजन कार्यक्रम में वे गए और न उन्हें बुलाया। न उनके प्रवीन मंगला से किसी तरह के रिश्ते रहे। ऐसे आरोप कोई भी लगा सकता है। अन्य लोगों को अपने साथ खड़ा कर सकता है। रहा सवाल रिश्तेदार मनोज गौतम को सहयोग का तो मेरे लिए सभी बराबर हैं। इस पूरे मामले में राजनीतिक साजिश की बू आ रही है।