फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बिटिया के सदमे में मां की हालात बिगड़ी

Mon, 10 Jun 2019 01:54 AM IST
राजेश सिंह अभिषेक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़
विज्ञापन
मृतक बच्ची की याद दिलाती उसकी पेंसिल, रबर, कटर। - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन
 दस दिन से मासूम बच्ची की दर्दनाक मौत से सदमे में आई उसकी मां बेसुध है। उसको खुद का कोई होश नहीं रह गया है। बच्ची के जाने के बाद से सूने हो चुके आंगन में ही उसके दिन रात बीत रहे हैं। बच्ची की नानी और मौसी कभी कभी उसको जबरदस्ती पानी या चाय पिला देती हैं। मां ने खाना छोड़ दिया है। खाना नहीं खाने और सदमे के कारण शनिवार की रात मां की तबियत अचानक बहुत खराब हो गई। आनन-फानन लोग पास के ही डॉक्टर को बुला कर लाए तो उन्होंने ड्रिप चढ़ाई। ड्रिप रात भर चढ़ी तो रविवार को मां को होश आया। मां अब भी बिटिया की दर्दनाक मौत से गमगीन है। वह किसी से ज्यादा बात भी नहीं कर रही है। परिवार वालों को मां की चिंता सता रही है कि कहीं बच्ची के गम में हालात और खराब न हो जाए।
विज्ञापन




पांच साल की पूजा-पाठ, मन्नतों की संतान थी इकलौती बेटी ः परिजनों ने बताया कि बच्ची की मां दो बहनें इसी घर में ब्याही हैं। बच्ची की मां की शादी 2012 में हुई थी। पांच साल तक कोई संतान नहीं हुई। बच्ची के मां बाप औलाद की आस में दर-दर भटकते रहे और पूजा पाठ के साथ कई मन्नतों के बाद घर में किलकारी गूंजी। बच्ची का जन्म वर्ष 2017 में हुआ तो मां बाप के आंसू हंसी ठिठोली में बदल गए। मां की गोद भरी तो घर में सभी के लिए बच्ची भगवान का वरदान बन गई।


हर कोई उसको गोद भरने को लालायित रहता। घटना के दिन 30 मई की सुबह लगभग साढ़े आठ बजे बच्ची नहा कर पड़ोस में बाबा के घर बच्चों के साथ खेलने के लिए जाने की जिद कर रही थी। मां ने उसको कुछ खिलाना चाहा तो वह जाने की जिद करने लगी, लेकिन उसकी जिद के बाद भी मां ने उसको चाय पिलाई। चाय के कुछ घूंट पीकर वह अपने खिलौने लेकर वह बाबा के घर पहुंच गई। लगभग एक घंटे बाद मां का कलेजा फिर हूका और बच्ची को कुछ खिलाने के लिए वह घर से नाश्ता लेकर निकली। मां नाश्ता लिए वहां पहुंची तो बच्ची नहीं मिली। इसके बाद मां आसपास में बच्ची को तलाशती रही, लेकिन कोई खबर नहीं मिली। बच्ची के गायब होने के दिन से और उसका शव मिलने तक से मां बेसुध है। कभी-कभी वह कहती है कि जब बिटिया खाली पेट चली गई तो वह क्या खाए..?
विज्ञापन




मां ने दो साल के अंतराल में खोई दो औलादः मां का दुख एक औलाद को खो देने का नहीं है। उसने दो साल में दो-दो औलादों को खो दिया। बच्ची के बाद उसका एक भाई पेट में था जो जन्म से पहले ही गर्भ में दम तोड़ गया था। बेटे के इस वाकये में मां की जान किसी तरह से बच सकी। उसको दस बोतल खून चढ़ाया गया था। बच्ची की नानी और उसकी मौसी अब हर हाल में बच्ची की मां को बचाना चाहती हैं जिससे गृहस्थी उजड़ने से बच सके, लेकिन मां की हालात दिन ब दिन खराब हो रही है। जब बच्ची की मां को लोग ज्यादा दिलासा देते हैं तो वह कहती है कि आप लोग तो चले जाओगे फिर क्या होगा..?
बच्ची की बड़ी बहन दहशत में ननिहाल से नहीं आ रही घर ः बच्ची की मां और मौसी एक ही घर में ब्याही हैं। इसलिए मौसी की बड़ी बेटी और बच्ची के बीच भी प्यार है। बड़ी बहन गर्मी की छुट्टी होने के बाद पास में ही अपने ननिहाल चली गई थी।


बच्ची के गायब होने और उसकी हत्या होने की खबर जब ननिहाल में पहुंची तो   बड़ी बहन भी दहशत में आ गई है। अब वह अपने घर नहीं आना चाहती है। वह ननिहाल में अपने मामा मामी से कहती है कि अगर वो घर जाएगी तो कोई उसको भी उठा ले जाएगा और वह भी चली जाएगी। बड़ी बहन की ये दहशत उसके दिल में घर कर गई है। इसलिए घर वाले उसे ननिहाल से बुलाने में बच रहे हैं। 
विज्ञापन


घर वाले सोच रहे हैं कि जब घर का माहौल कुछ शांत हो जाएगा। तभी बड़ी बहन को घर बुलाया जाएगा। बड़ी बहन की उम्र छह वर्ष है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें