श्रीकेदारनाथ आपदा के साढ़े पांच साल बाद वापस लौटी कंचन की कहानी हर किसी की जुबां पर है। मानसिक दिव्यांग चंचल दादा दादी से बार बार लिपट जाती है लेकिन शब्दों से अपनी कहानी बयां नहीं कर पाती है। अब उसको अपनी मम्मी का बेसब्री से इंतजार है। उसकी मम्मी सीमा गाजियाबाद में है जिनको फोन कर चंचल के वापस आने की खबर दी गई है।
वह भी कुदरत के इस करिश्मे से हैरान हैं। चाइल्ड लाइन के ज्ञानेंद्र मिश्रा ने बताया कि राजेश और सीमा तीन बच्चों चंचल, दुर्गेश व शिवानी के साथ केदारनाथ दर्शन के लिए गए थे। राजेश का आपदा के बाद कोई पता नहीं चला। सीमा और उसकी तीन बेटियां दुर्गेश, शिवानी व चंचल भी बिछड़ गए। मानसिक दिव्यांग चंचल को आंखों से भी कम दिखता है। इसलिए उसकी ज्यादा चिंता सताई। इस बीच कुछ दिन बाद सीमा को दुर्गेश और शिवानी तो मिल गईं लेकिन चंचल का कुछ पता नहीं चला।
दरअसल, चंचल को उत्तराखंड पुलिस ने जम्मू के बालिका मानसिक दिव्यांग आश्रय स्थल पहुंचा दिया क्योंकि ऐसी कोई और जगह आसपास में नहीं थी। इस आश्रय स्थल में अक्सर जाने वाली बाल कल्याण समिति जम्मू की अध्यक्ष शालिनी शर्मा जब चंचल से मिलीं तो उसने अलीगढ़ का जिक्र किया।
शालिनी ने कई बार अलीगढ़ का नाम सुनने के बाद डेढ़ माह पूर्व शहर विधायक संजीव राजा से चंचल के परिजनों के तलाश हेतु मदद मांगी। शहर विधायक ने उड़ान सोसाइटी से संचालित अलीगढ़ चाइल्ड लाइन के निदेशक ज्ञानेंद्र मिश्रा से बालिका के परिजनों का पता लगाने को कहा।
इसके बाद चंचल के बाबा हरिशचंद्र को बन्ना देवी पुलिस के माध्यम से खोजा गया। बाल कल्याण समिति के सदस्यों मटरू मल, अजय सक्सेना, साधना गुप्ता, पद्मारानी, काउंसलर सीमा रानी के साथ चाइल्ड लाइन की समन्वयक नैंसी वर्गीस, नदीम अहमद, निर्मल कुमारी का इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
पत्नी को खो देने वाले योगेश की आंखें अब भी नम हो जाती हैं
साढ़े पांच साल पहले हुई केदारनाथ आपदा में अलीगढ़ जिले के लगभग 36 लोग लापता हुए थे। जिनकी अभी तक कोई सूचना नहीं मिली है। वापस आई चंचल उर्फ तुलसी गायब लोगों की इस सरकारी सूची में शामिल नहीं थी क्योंकि वह परिवार सहित गाजियाबाद से केदारनाथ की यात्रा पर गई थी। वह गाजियाबाद की सूची में शामिल रही थी। उसके पिता का जिक्र भी उसी सूची में है।
उस दर्दनाक हादसे को याद कर भाजपा नेता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता योगेश शर्मा की आंखें अब भी नम हो जाती हैं। उन्होंने इस घटना में अपनी पत्नी सर्वेशलता शर्मा, समधन गिरजेश शर्मा और छोटे भाई सरीखे ड्राइवर नीरज को खो दिया था। इन तीनों का अब तक कोई पता नहीं चला है। योगेश कहते हैं कि एमएस ट्रैवल्स की बस से 29 लोग उत्तराखंड केदारनाथ की यात्रा पर गए थे। जिसमें चार बस का स्टाफ था बाकी तीथयात्री। इनमें से 21 लोग अब तक वापस नहीं आए इसमें ही उनके परिजन भी शामिल थे।
शहर के लापता लोगों में महानगर के सराय हकीम निवासी राजकीय ठेकेदार प्रमोद वार्ष्णेय, उनकी पत्नी मिथलेश वार्ष्णेय, मित्र नगर निवासी इंजीनियर बीवी शर्मा, उनकी पत्नी नीरज शर्मा। बन्नादेवी फ ायर बिग्रेड कॉलोनी निवासी सुशीला शर्मा, बृजभूषण, मनोरमा व दो अन्य लोग। बैंक कॉलोनी प्रीमियर नगर निवासी ओम वार्ष्णेय, उनकी मां गायत्री देवी, बीवी सुमन, बेटा जुगनू, बेटी मुस्कान। हरेंद्र सिंह, साधना, रघुराज सिंह, रामवीर सिंह, राजेंद्र कुमार, विमलेश, ओमपाल, अखिलेश, सतीश कुमार सिंह के अलावा धनीपुर मंडी का परिवार आदि शामिल हैं।