घर के जीने का दरवाजा खुला था। जीने के रास्ते एक बंदर का बच्चा घर में घुस आया। इसकी जानकारी शांति स्वरूप शर्मा को नहीं हुई। अचानक ही उन्होंने जीने का दरवाजा खुला देखा तो उसे बंद कर दिया। इससे बंदर का बच्चा घर के अंदर फंस गया। वहीं जीने का दरवाजा बंद होने और अंदर से बच्चे की आवाज सुनकर बड़ी संख्या में बंदर उनके घर के चारों ओर एकत्र हो गए।
9 मार्च को बंदरों ने एक घंटे तक एक घर को घेरे रखा। इस दौरान घर के अंदर मौजूद दंपती एक घंटे तक एक कमरे में कैद रहा। इस दौरान वह अपने आप को बचाने के लिए लोगों से मदद भी मांगते रहे। आसपास के लोगों ने किसी तरह बंदरों को भगाया, जिसके बाद दंपती घर से बाहर निकल सके।
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पुराना बाजार निवासी शांति स्वरूप शर्मा के अनुसार 9 मार्च को घर के जीने का दरवाजा खुला था। जीने के रास्ते एक बंदर का बच्चा घर में घुस आया। इसकी जानकारी उन्हें नहीं हुई। अचानक ही उन्होंने जीने का दरवाजा खुला देखा तो उसे बंद कर दिया। इससे बंदर का बच्चा घर के अंदर फंस गया।
वहीं जीने का दरवाजा बंद होने और अंदर से बच्चे की आवाज सुनकर बड़ी संख्या में बंदर उनके घर के चारों ओर एकत्र हो गए। उन्होंने पूरे घर को घेर लिया। बंदरों से डरकर शांति स्वरूप शर्मा अपनी पत्नी सहित एक कमरे के अंदर कैद हो गए। आसपास के लोगों ने किसी तरह बंदरों को भगाया। इसके बाद दरवाजा खोला तो बंदर का बच्चा बाहर निकला। इसके बाद दंपती भी बाहर निकल सके।